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"हर एक स्त्री और पुरुष को प्यार करने और प्यार पाने का जन्मजात और प्राकृतिक अधिकार है। इसलिए हर एक व्यक्ति को प्रेम सम्बन्ध में होना चाहिए।"-"Every Woman and Man Have Inherent and Natural Right to Love and being Loved. Therefore Every Person Should be in Loving Relationship."

Friday, 31 May 2013

दूसरा विवाह-Second Marriage

जीवन को उलझा देता है दूसरा विवाह-कभी व्यक्ति दूसरा विवाह करने के बाद भी अपने पहले पति या पत्नी से दोस्ती का संबंध निभाने लगता है तो कभी संबंधित व्यक्ति के अभिभावक या परिवार वाले व्यावसायिक या निजी तौर पर उसके पूर्व जीवन-साथी के संपर्क में रहते हैं.

दूसरा विवाह-प्रथम विवाह तो एक सुखद घटना के रूप में ही ली जाती है लेकिन दूसरा विवाह एक दुखद घटना के घटित होने के बाद ही संभव होता है. वह दुखद घटना जीवनसाथी का निधन या फिर तलाक कुछ भी हो सकता है. प्रथम से दूसरे विवाह की राह बहुत कठिन होती है . वह चाहे पत्नी हो या फिर पति - दोनों को ही सामान्य विवाह से अधिक अपेक्षाएं और दायित्व मिलते हैं और इसके लिए दोनों को ही पहले शारीरिक रूप से कम लेकिन मानसिक रूप से ज्यादा तैयार होने पर ही दूसरे विवाह का निर्णय लेना चाहिए. पत्नी के लिए पति के पूर्व पत्नी से जुडी यादों का सामना भी करना पड़ सकता है. इसके लिए मानसिक परिपक्वता बहुत ही आवश्यक है क्योंकि दोनों ही शेष जीवन सुख पूर्वक जीने के लिए विवाह करने जा रहे होते हैं और अगर इस विवाह से उनको वही न मिल सके तो फिर उनका शेष जीवन नरक भी बन सकता है. अपेक्षाएं कभी अकेली नहीं होती बल्कि उसके साथ दायित्वों और कर्तव्यों का साथ भी होता है. इस बात को कभी भूलना नहीं चाहिए. पूरा लेख पढ़ें 

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