Labels

"हर एक स्त्री और पुरुष को प्यार करने और प्यार पाने का जन्मजात और प्राकृतिक अधिकार है। इसलिए हर एक व्यक्ति को प्रेम सम्बन्ध में होना चाहिए।"-"Every Woman and Man Have Inherent and Natural Right to Love and being Loved. Therefore Every Person Should be in Loving Relationship."
Showing posts with label सेक्स-Sex. Show all posts
Showing posts with label सेक्स-Sex. Show all posts

Tuesday, 3 June 2014

कंडोम के दुष्प्रभाव

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'

आजकल छोटी उम्र की लड़कियों से लेकर उम्रदराज स्त्रियों तक सभी के द्वारा कंडोम को सबसे सुरक्षित गर्भनिरोधक के रूप में उपयोग किया जा रहा है। यही कारन है कि शतप्रतिशत सेक्सवर्कर अर्थात स्त्री वैश्याएँ बिना ये जाने कि कंडोम की क्वालिटी अर्थात गुणवत्ता शुरक्षित है या नहीं,  कंडोम का धड़ल्ले से उपयोग कर रही हैं। बेफिक्री से कंडोम का उपयोग करने वाली वयस्क महिलाओं और छोटी उम्र की लड़कियों तक में कंडोम के दुष्प्रभाव देखने को मिल रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद भी लड़कियॉं और स्त्रियॉं धड़ल्ले से कंडोम का उपयोग करने में कोई संकोच नहीं कर रही हैं। जिसके प्रमुख कारण हैं। प्रथम-हर वर्ग और जगह के आम-ओ-खास लोगों में कंडोम को सबसे सुरक्षित गर्भनिरोधक के रूप में मिल चुकी मान्यता। दूसरा-गर्भनिरोधक गोलियों का मंहगा होने के साथ, उनके साइड इफेक्ट का डर और तीसरा-कंडोम के दुष्प्रभावों के बारे में, विशेषकर स्त्रियों में अज्ञानता। अनेक डॉक्टर्स द्वारा किये गये क्लीनिकल अध्यनों से कंडोम के ऐसे-ऐसे दुष्प्रभाव सामने आ रहे हैं, जिनके चलते स्त्री का सेक्स जीवन ही समाप्त हो रहा है, जो आने वाले समय में स्त्रियों और पुरुषों के लिये गम्भीर रूप से चिन्ता का विषय है। अभी तक के अध्ययनों के परिणामों से कंडोम के निम्न दुष्प्रभाव सामने आये हैं :-

01. दर्द एवं एलर्जी : ऐसा देखा गया है कि लगातार अर्थात सप्ताह में दो से अधिक बार कंडोम का उपयोग करने से योनि की आंतरिक परत और झिली में संवेदनशीलता काम या समाप्त हो जाती है। जिसके कारन स्त्रियों की यौनि से स्खलित होने वाले प्राकृतिक लुब्रिकेंट (चिकनाई युक्त) दृव्यों का स्वत: स्खलन कम हो जाता है या पूरी तरह से बन्द हो भी जाता है। जिसके चलते यौनि में खरास या सूखापन आता देखा गया है। जिसके कारण कंडोम का अधिक उपयोग करने वाली औरतों की योनि स्पर्श कातर (छुअन से ही दर्द महसूस होने वाली) हो जाती है। ऐसी स्थिति का सामना कर रही स्त्रियों द्वारा अपने प्रेमी या पति के साथ बिना कंडोम के सेक्स करने पर यौनि में असहनीय दर्द, जलन, एलर्जी और खुजली होना आम बात है।

02. सेक्स में आनन्द नहीं : जो स्त्रियॉं कंडोम का अधिक उपयोग करती हैं, कुछ समय बाद उनकी योनि में यौनेच्छा तथा रोमांच पैदा करने वाली स्वाभाविक चिकनाई और पुरुष के स्पर्श की सुखद अनुभूति कम या समाप्त ही हो जाती है, जिससे उनके मन में सेक्स के प्रति रुचि और संवेदना तो कम या समाप्त होती देखी ही गयी है, इसके साथ-साथ ऐसी स्त्रियों के जीवन में सेक्स क्रिया भी दु:खदायी शारीरिक श्रम की भांति ही पीड़ादायक अनुभव में बदल जाती है। इस कारण ऐसी स्त्रियॉं बिना कंडोम सेक्स करने से कतराने लगती हैं। ऐसी सूरत में उनके लिए कंडोम का उपयोग अपरिहार्य हो जाता है।

03. योनि ग्रीवा में कटाव और घाव : उक्त बिंदु दो में बताये गए में कंडोम का अधिक उपयोग करने से योनि ग्रीवा में कटाव और छिलन के साथ-साथ दर्दनाक घाव भी होते देखे गये हैं। जिसके चलते योनि में सोजन आ जाती है। योनि में सोजन की स्थिति में सेक्स करने पर योनि का आन्तरिक हिस्सा फिर से घायल हो जाता है। जिससे योनि में फिर से जख्म हरे हो जाते हैं। कई बार जख्मों से रक्तस्त्राव भी होने लगता है। जिसे स्त्रियॉं असमय मासिक चक्र का आना मानकर उसकी परवाह नहीं करती हैं और इस कारण से उन्हें जननांगों और गर्भाशय में भयंकर संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता है। जिससे योनि ग्रीवा या गर्भाशय में कैंसर होने का खतरा भी बना रहता है।

04. संक्रमित स्त्रियों के साथ बिना कंडोम सेक्स करने पर पुरुषों की लिंग में दर्द : लगातार कंडोम का उपयोग करने वाली स्त्रियों की योनि की आन्तरिक परत की स्वाभाविक नाजुकता, चिकनाई तथा लोच प्राय: समाप्त हो जाती है। योनि के आन्तरिक हिस्से में सोजन आ जाने या रूखापन आ जाने की वजह से योनि की नलिका (जिसमें सम्भोग क्रिया की जाती है वह) सकड़ी (छोटी) हो जाती है, जिससे योनि में लिगं को प्रवेश कराने में भी दिक्कत होती है। योनि इतनी सूखी और कठोर हो जाती है कि बिना कं डोम सेक्स करने वाले पुरुष की लिंग के साथ योनि की आंतरिक रूखी त्वचा का घर्षण होने से सेक्स क्रिया के दौरान लिंग में दर्दनाक पीड़ा होती है, जिससे लिगं पर छाले तथा जख्म हो जाते हैं। आम तौर पर वैश्याओं की योनि में ऐसे लक्षण देखे गये हैं। विशेषकर उन स्त्रियों में जो दोहरा जीवन जीती हैं। जैसे घरेलु औरतें किसी कारण से गुप-चुप वैश्यावृति करती हैं, उनके पतियों के ओर से डॉक्टरों को इस प्रकार की शिकायत की जाती हैं कि सेक्स करने से उनके लिंग में जख्म आ जाते हैं। लिंग को योनि में प्रवेश कराने में दिक्कत होती है। चिनाई या जैली का उपयोग करने के बाद भी ऐसी स्त्रियों के पतियों को बिना कंडोम सेक्स करने पर भयंकर दर्द का सामना करना पड़ता है। सेक्स करने के बाद कई दिन तक उनके लिंग में सोजन आ जाती है या लिंग के बाहरी हिस्से में जख्म हो जाते हैं। जिसके चलते वे सेक्स करने से ही कतराने लगते हैं।

06-लेटेक्स के बने कंडोम : लेटेक्स के बने कंडोम आपको गर्भधारण और योन-संचारित रोगों से बचाते हैं। मगर ये एलर्जी का सबसे आम कारण हैं और सेक्स के दौरान स्त्री की प्रतिक्रिया को घटा देते हैं, क्योंकि इसके प्रयोग के कारण योनि में सूखापन और खुजली के रूप में देखा गया है। इसका सबसे खराब दुष्प्रभाव है, स्त्री-पुरुष के जननांगों पर गंभीर दाने या जानलेवा आघात के रूप में दिख सकता है।

07-योनि की प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान : प्रकृति ने जननांगों को खुद ही अपनी प्रतिरक्षा की जन्मजात शक्ति प्रदान की लेकिन यदि सप्ताह में दो बार से अधिक कंडोम का उपयोग किया जाता है तो कंडोम योनि की प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके उपयोग से योनि की अम्लीय वातावरण में उथल-पुथल पैदा हो जाती है।

Monday, 2 June 2014

सेक्स करते समय गलतियां करने से बचें

किसी ने ठीक ही कहा है कि जल्दी का काम शैतान का होता है। सेक्स एक ऐसी प्रक्रिया है जिसे जितना खूबसूरती के साथ धीरे-धीरे एहसास करोगे वो आपके लिए उतना ही आनन्ददायक बन जाएगा। ऐसे समय में कई बार जल्दबाजी करना गलत साबित हो जाता है और ये जल्दबाजी आपके साथी और आपके लिए घातक सिद्ध हो सकते हैं। जल्दबाजी से आपको या आपके साथी को संक्रमण या फिर शारीरिक या मानसिक तकलीफ से भी गुजरना पड सकता है। सेक्स से पहले जरूरी है आपका मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ होना। आइए जानते हैं कि सेक्स के दौरान ऐसी क्या सावधानियां रखें जिनसे गलतियां होने की संभावना न रहे और इसे और ज्यादा रोचक बनाया जा सके।
  1. सेक्स के दौरान आपका पूरा ध्यान अपने साथी पर होना चाहिए। उस समय आपको सिर्फ अपने साथी पर फोकस करना चाहिए, इसके लिए आपको आस-पास की पूरी दुनिया को भूलाकर अपने साथी को अपनी नजदीकी का एहसास कराना चाहिए। 
  2. सेक्स के तुरंत बाद सोना नहीं चाहिए और न ही अपने साथी से दूर होकर बैठना चाहिए बल्कि अगर आप उस समय अपने साथी से बात करेंगें तो उसे ज्यादा अच्छा महसूस होगा। 
  3. सेक्स के बाद यदि आप डिना करना चाहते हैं तो अपने साथी को अपने हाथों से खाना खिलाएं और यदि आप सोने के मूड में हैं तो अपने साथी को एक अच्छी सी मसाज ऑफर करें उसे बहुत अच्छा लगेगा। 
  4. जरूरी नहीं सेक्स हमेशा बेड पर ही किया जाए आप सेक्स के दौरान स्नान भी कर सकते हैं इससे आपको सेक्स के दौरान एक फ्रेशनेस महसूस होगी और बाद में आप एक अच्छी नींद ले सकेंगें। 
  5. सेक्स के दौरान कभी अपे साथी से जबरन नजदीकी बनाने की कोशिश न करें इससे सेक्स समस्याएं भी हो सकती हैं बल्कि उसे सेक्स के लिए राजी करने की कोशिश करें और ये भी ध्यान रखें कि आपका साथी मानसिक रूप से किसी प्रकार के तनाव में न हो जिससे दोनों साथी सेक्स को पूरी तरह से एन्जॉय कर सकें। 
  6. सेक्स के दौरान जरूरी है कि आप इधर-उधर की बातें करने के बजाय रोमांस और प्यार की बातें करें। संभव हो तो मंदिम लाइट में हल्का संगीत भी चला सकते है जिससे सेक्स के दौरान दोनो साथी एक-दूसरे को अपने करीब पा सकें। 
  7. सेक्स के दौरान आपको अपना उत्साह भी दिखाना चाहिए। आपके साथी को ये नहीं लगना चाहिए कि आप सिर्फ अपने साथी को खुश करने के लिए उसके साथ है। 
  8. पुरुष सेक्स को लेकर ज्यादा उत्साहित होते हैं और इसी वजह से वह सेक्स को अलग-अलग तरीकों से करना चाहते हैं लेकिन आमतौर पर महिलाएं सेक्स के प्रति ज्यादा रुचि नहीं दिखाती हैं। सेक्स के दौरान महिलाओं को ऐसा नहीं करना चाहिए उन्हें भी अपने साथी को सेक्स में पूरा सहयोग करना चाहिए। 
  9. महिलाओं को इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि वे सेक्स के दौरान अपने साथी को अकेलापन महसूस न होने दें, क्योंकि इसी में दोनों साथियों की सेक्स समस्या का समाधान छुपा है। 
  10. यदि आप सेक्स को रोचक बनाना चाहते हैं और आप ये चाहते हैं कि सेक्स और आपमें आपके साथी की रुचि हमेशा बनी रहे तो इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए सेक्स के दौरान गलतियां करने से बचें।

    स्त्रोत : आजतक समाचार, (//2012 , May , 30 , Wed,8:53 pm)
    - See more at: http://aajtaksamachar.com/menu.php?art=1001#sthash.dF5znhUq.dpuf

Sunday, 1 June 2014

स्कूल में ही सेक्स कर लेती हैं 75 फीसदी लड़कियां!

नई दिल्ली। मैं कुंवारी हूं, लेकिन मुझे सेक्स के बारे में सबकुछ पता है, मेरी क्लास की 75 फीसदी लड़कियां सेक्स कर चुकी हैं, अगर मेरे ब्वायफ्रेंड के दूसरी लड़कियों के साथ संबंध है तो इसमें गलत क्या है, मेरे भी तो दूसरों के साथ संबंध हैं। मैं फेसबुक पर हर वो बात कह सकती हूं, जो आमतौर पर किसी के सामने नहीं कह सकती, सही मायने में फेसबुक हमारे लिए ही बना है।

ये जुमले सुनकर आपका चौंकना लाजिमी है लेकिन ये जानकर आपको और झटका लगेगा कि ये जुमले स्कूल जाने वाले लड़के-लड़कियों के हैं। वो जिनकी उम्र 13 से 20-21 साल की है और वो खुद को फेसबुक पीढ़ी कहलाया जाना पसंद करती है। भूल जाइए अपने वक्त की बातें, भूल जाइए अपना दौर, नए जमाने के टीनएजर्स के लिए जिंदगी के मायने बदल चुके हैं। हो सकता है ये रिपोर्ट देखकर आपकी पुरानी मान्यताओं को झटका लगे। हो सकता है आप का दिल इसे सच न माने लेकिन हकीकत यही है।

अब तक ऐसी बातें आपने फिल्मों में देखी-सुनी होगी, लेकिन आज मेट्रो शहरों की फेसबुक पीढ़ी के बीच ऐसी ही बातें होती हैं। सेक्स को लेकर ये पीढ़ी किसी बंदिश को नहीं मानती, और सेक्स के बारे में इनके बीच खुली बातचीत होती है। ये हकीकत है मेट्रो शहरों के स्कूलों में जाने वाले उन लड़के-लड़कियों की जो मोबाइल फोन के बिना एक पल नहीं जी सकते। लैपटॉप उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। उनकी बातचीत में चैट, ब्राउज, एसएमएस, ट्विटर, फेसबुक, स्मोक, ड्रिंक्स और सेक्स जैसे शब्द आम हो गए हैं।

इस पीढ़ी के लड़के-लड़कियां एडल्ट फिल्में देखते हैं, सेक्स करते हैं और सेक्स संबंध बनाने के बाद लड़कियां गर्भ निरोधक गोलियों का बेधड़क इस्तेमाल करती हैं। एक वीकली मैग्जीन में छपे सर्वे के मुताबिक मेट्रो शहरों के स्कूलों में पढ़ने वाली हर 100 टीन एजर लड़कियों में से 25 लड़कियां सेक्स कर चुकी हैं। लेकिन जब इस सर्वे के बारे में स्कूल जाने वाली एक लड़की से बात की गई तो उसने बताया कि ये आंकड़ा गलत है। उसकी क्लास में पढ़ने वाली 75 फीसदी लड़कियां सेक्स कर चुकी हैं।

एक सर्वे के मुताबिक मेट्रो शहरों में पली-बढ़ी ये पीढ़ी एक दिन में 38 घंटे का काम निपटा रही है। इसमें चैटिंग, ब्राउजिंग, फोन पर बातचीत, एसएमएस, शराब पीना और सेक्स तक शामिल है। ये बात भी सामने आई है कि 12वीं में पढ़ने वाले कई छात्र तो हर वक्त पॉकेट में कॉन्डोम लेकर घूमते हैं। ये सोचकर कि न जाने कब इसकी जरुरत पड़ जाए।

मेट्रो शहरों के इन लड़के-लड़कियों के बीच मल्टीपल डेटिंग का कॉन्सेप्ट तेजी से फैल रहा है। यानी एक ही वक्त में एक से ज्यादा बॉयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड। इतना करने के बाद भी किसी से कुछ छिपाने की जरुरत नहीं क्योंकि ये पीढ़ी एफडब्ल्यूबी में यकीन रखती है। FWB यानी Friends With BenefitS, सिर्फ सुविधा के लिए बनाया गया दोस्त। इस पीढ़ी का मूल मंत्र है नो कमिटमेंट, नो डिमांड, नो प्रॉब्लम। यानी जिस उमर के लड़के-लड़कियों को दुनियादारी के मामले में नादान समझा जाता है। उस उमर में वो रिश्तों की नई परिभाषा गढ़ रहे हैं।

इन टीनएजर्स को पढ़ाई में आगे रहने से ज्यादा इस बात की फिक्र होती है कि उनके फेसबुक प्रोफाइल में उनकी तस्वीर बुरी तो नहीं लग रही। लड़कियों को डर रहता है कि कोई दोस्त उनकी तस्वीरें देखकर फगली न लिख दे। फगली- फैट और अगली शब्दों को मिलाकर बना है (यानी मोटी और भद्दी)। इन स्कूली छात्रों में इस बात की होड़ लगी रहती है कि किसके फेसबुक अकाउंट में सबसे ज्यादा फ्रेंड हैं।

स्त्रोत : आईबीएन-7 | 07-Jan 11:22 AM

Saturday, 8 March 2014

औरतों को सेक्‍स लाइफ के बारे में पति से ज्‍यादा दोस्‍तों से बात करना पसंद

सेक्‍स लाइफ के बारे में पति से ज्‍यादा दोस्‍तों से बात पसंद

अमूमन महिलाएं अपने पार्टनर से लगभग हर बात शेयर करती हैं। लेकिन एक स्‍टडी में इस बात का खुलासा हुआ है कि महिलाएं अपनी सेक्‍स लाइफ के बारे में अपने पति से ज्‍यादा दोस्‍तों से बात करना पसंद करती हैं।

रिसर्च के मुताबिक 34 फीसदी महिलाएं जब अपनी दोस्‍तों के साथ नाइट आउट के लिए जाती हैं तो वे सेक्‍स पर बात करना पसंद करती हैं, जबकि सिर्फ 16 फीसदी महिलाएं अपने पार्टनर से इस विषय पर चर्चा करती हैं। वहीं 57 फीसदी महिलाएं नाइट आउट के दौरान परिवार और 54 फीसदी छुट्टियों के बारे में बातें करती हैं।

महिलाओं के गेट-टूगेदर के दौरान 64 फीसदी पुरुष महिलाओं के पुरुष साथियों के बारे में बातें करते हैं, जबकि करीब 50 फीसदी पुरुषों ने कहा कि वे दूसरों के रिलेशनशिप पर गॉसिप करना पसंद करते हैं।

रिसर्च से इस बात का भी पता चला है कि महिलाएं डेट की तुलना में दोस्‍तों के साथ बाहर जाने के लिए ज्‍यादा सजती-संवरती हैं और हर तीन में से एक महिला अपने लिए नए कपड़े खरीदती है, जबकि डेट पर जाने के लिए 5 में से 1 महिला ही ऐसा करती है। यही नहीं वे मेकअप करने में 50 मिनट लगाती हैं।    

Wednesday, 8 January 2014

सेक्स गैप: कितना और क्यों?-Sex Gap: How and why?

सेक्स में सिर्फ दो शरीर ही करीब नहीं आते बल्कि जेहनी तौर पर भी आप एक-दूसरे के करीब महसूस करते हैं। आप सेक्स को तभी एंज्वॉय कर सकते हैं, जब अपने पाटर्नर के लिए आपके दिल और दिमाग में भी इमोशंस हों। इसलिए अगर आप चाहते हैं कि आपके रिश्तों में मिठास बनी रहे तो जरूरी है कि आपके सेक्सुअल रिलेशंस अच्छे रहें। इसके अलावा एक बात का ध्यान रखें कि सेक्स में गैप रखें। सेक्स में गैप रखना बेहद क्यों जरूरी है। आइए जानते हैं :-

1. सेक्स बार-बार न करें। मतलब सेक्स में गैप जरूर रखें। अगर आप चाहते हैं कि आपका फिजीकल लव में क्रेज बरकरार रहे तो रोजाना सेक्स न करें। इससे आप जल्दी ही बोर हो सकते हैं। सेक्स में गैप रखने से आप दोनों की तड़प आपको एक-दूसरे के और करीब ले जाएगी। साथ ही आपकी नजदीकियां बढ़ती ही जाएंगी।

2. कभी-कभी आप किसी भी वक्त सेक्स करने में जरा भी नहीं सोचते। खासकर अलग रहने वाले कपल दिन, दोपहर, शाम जब उनका मूड करता है वो सेक्स कर लेते हैं, लेकिन ऐसा करते वक्त वो ये भूल जाते हैं कि जरूरी नहीं कि आपका पार्टनर भी हर वक्त इसके लिए तैयार ही हो। अगर ऐसा हो तो पार्टनर की मर्जी को अपनी मर्जी बनाना ही समझदारी है।

3. अगर आपका साथी मेंटल स्ट्रैस (मानसिक दबाव) से गुजर रहा हो तो सेक्स न करें। अगर आप या वो किसी चिंता, तनाव या बड़ी मुश्किल को झेल रहे हैं तो सेक्स करने से बचना चाहिए। इसके अलावा अगर आप लोगों में भी किसी तरह का झगड़ा या भावनात्मक अलगाव चल रहा हो तो पहले रिश्ते की कड़वाहट को दूर करने की कोशिश करें। किसी बात पर गुस्सा हों तो भी पहला अपना गुस्सा ठंडा कर लें, तब ही सेक्स करें।

4. शादी के बाद महिलाओं के हार्मोंस में बदलाव आना स्वाभाविक है। इसकी वजह फीजिकल रिलेशन ही होता है। ऐसे में जरूरी है कि सेक्सुअल रिलेशन में गैप रखा जाए। ऐसा करने से हार्मोंस में बैलेंस बना रहेगा। कभी-कभी हार्मोंस के अनबैलेंस से मुश्किल हो सकती है।

5. पीरियड्स में सेक्स न करें। इस दौरान ज्यादातर महिलाओं को काफी परेशानी होती है। कई बार तो महिलाएं बीमार तक हो जाती हैं। महिलाओं को इस दौरान थोड़ा सा भी दर्द रहता हो तो सेक्स से बचें। इससे आप किसी बड़ी बीमारी का शिकार हो सकती हैं। अगर आप हाइजीन कॉसेंस हैं तो उस वक्त सेक्स करना आपके पार्टनर या आपके लिए असहज हो सकता है।

6. इसके अलावा किसी भी तरह की सेक्सुअल ट्रांसमिटेड डीजीज या इंफेक्शन हो तो सेक्स करने से बचें। आपका इंफेक्शन आपके पार्टनर को भी हो सकता है।
स्त्रोत : श्री न्यूज
[3.12.2012]

Friday, 15 November 2013

ये 7 चीजें घटाती हैं सेक्स क्षमता

ये 7 चीजें घटाती हैं सेक्स क्षमता

सेक्स ड्राइव किलर्स

ये तो आप जानते ही होंगे तनाव कि स्थिति में व्यक्ति को सेक्स की इच्छा नहीं होती है। लेकिन इस तनाव पर काबू पाया जा सकता है ताकि सेक्स जीवन कायम रह सके।

तनाव के अलावा भी बहुत सी ऐसी चीजें हैं जो सेक्‍स में रूचि को कम करती हैं। वेबएमडी ने एक सूची बनाई है जो सेक्स ड्राइव किलर्स हैं और उन पर काबू पाया जा सकता है। जानिए, क्या है ये सेक्स ड्राइव किलर्स।

पार्टनर के साथ समस्या

सेक्स में रुचि ना होने का सबसे बड़ा कारण होता है पार्टनर के साथ अनबन। आपस के झगड़े, आपसी संवाद की कमी और एक-दूसरे पर विश्वास की कमी इसके मुख्य कारण हैं।

ऐसे में कोशिश करनी चाहिए आप आपसी मतभेदों को मिटाएं। अगर ऐसा संभव न हो तो आपको अपने पार्टनर के साथ जाकर काउंसलर से संपर्क करना चाहिए।

शराबी

सेक्स की इच्छा को कम करने में शराब का बहुत बड़ा हाथ है। एक ड्रिंक के बाद आपको लग सकता है कि आप को सेक्स करने कि इच्छा हो रही है लेकिन ज्यादा पीने से आपके पार्टनर का मूड ऑफ हो सकता है।
ऐसे में आपको अपनी शराब की लत से निजात पानी चाहिए। ये संभव ना हो तो आपको शराब की मात्रा कम कर देनी चाहिए नहीं तो आपको रिहैबिटेशन सेंटर की मदद लेनी चाहिए।

कम नींद आना

सेक्स के प्रति उदासीनता की एक वजह देर से सोना और सुबह जल्दी जगना भी है। इसके साथ-साथ ये भी महत्वपूर्ण है कि आपको नींद कैसी आती है।

ऐसे में आपको अपने सोने के समय को निश्चित करना चाहिए। संभव हो तो समय पर सोएं और तकरीबन 8 घंटे की नींद लें। सोने की अपनी आदत में सुधार करने के लिए आप डॉक्टर की मदद भी ले सकते हैं।

बच्चे के बादलों

कई बार ऐसा पाया गया है कि बच्चा होने के बाद पति-पत्नी के बीच दूरी हो जाती है। ध्यान बच्चे पर होता है और ऐसे में सेक्स के लिए समय को निकाल पाना मुश्किल होता है।

ऐसी स्थिति में बेहतर ये होगा कि किसी बेबी सिटर की मदद ली जाएं। संभव हो तो आप बच्चे के सोने के बाद दोनों एक-दूसरे को समय दें।

दवाइयां

कुछ ऐसी दवाइयां भी हैं जो सेक्स की इच्छा को कम कर देती हैं। इन दवाओं में आमतौर पर डिप्रेशन की दवाइयां, ब्लड प्रेशर की दवाइयां, गर्भ निरोधक की दवाइयां, कीमोथेरेपी और HIV निरोधी दवाइयां शामिल है।

यदि आप इस तरह की दवाइयां नियमित तौर पर ले रहे हैं तो आपको अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

मोटापा

यूं तो मोटापा अपने आप में एक समस्या है। मोटापे के कारण आदमी ठीक से परफॉर्म नहीं कर पाता है जिसकी वजह से सेक्स में उसकी रुचि नहीं रहती है।

इसलिए बेहतर सेक्स जीवन के लिए वजन को नियंत्रण में रखना जरूरी है। वजन कम करने के लिए आप रोजाना व्यायाम कर सकते हैं।

मीनोपॉज

मीनोपॉज के बाद वैजाइना ड्राई हो जाता है जिसकी वजह से सेक्स के दौरान दर्द होता है। लेकिन हर महिला का शरीर अलग होता है और अगर महिला चाहे हो अपनी इच्छाशक्ति की बदौलत मीनोपॉज के बाद भी सेक्स जीवन का आनंद ले सकती है।

यदि आपको मीनोपॉज हो चुका है तो आपको रोजाना व्यायाम करना चाहिए, संभव हो तो डॉक्टर से संपर्क करें।

कैसे बढ़ायें संभोग शक्ति?

रखें ध्‍यान करें चिकित्सा :

* उड़द की दाल को पानी में पीसकर पिट्ठी बनाकर कढ़ाई में लाल होने तक भून लें। इसके बाद गर्म दूध में इस पिसी हुई दाल को डालकर खीर बना लें। अब इसमें मिश्री मिलाकर किसी कांसे या चांदी की थाली में परोसकर सेवन करने से संभोग करने की शक्ति बढ़ जाती है। इस खीर को लगभग 40 दिनों तक प्रयोग करने से लाभ होता है।




* लगभग 10-10 ग्राम सफेद प्याज का रस और शहद, 2 अंडे की जर्दी और 25 मिलीलीटर शराब को एक साथ मिलाकर रोजाना शाम के समय लेने से संभोगशक्ति बढ़ जाती है।

* लगभग 5 बादाम की गिरी, 7 कालीमिर्च और 2 ग्राम पिसी हुई सोंठ तथा जरूरत के अनुसार मिश्री को एक साथ मिलाकर पीस लें और फंकी लें। इसके ऊपर से दूध पी लें। इस क्रिया को कुछ दिनों तक नियमित रूप से करने से संभोगक्रिया के समय जल्दी वीर्य निकलने की समस्या दूर हो जाती है।

* एक लौंग को चबाकर उसकी लार को लिंग के पिछले भाग पर लगाने से संभोग करने की शक्ति तेज हो जाती है।

वीर्य को बढ़ायें :

* इमली के बीजों को पानी में छिलका उतरने तक भिगो लें। इसके बाद इन बीजों का छिलका उतारकर चूर्ण बना लें। इसके लगभग आधा किलो चूर्ण में इतनी ही मात्रा में मिश्री मिलाकर रख लें। इसमें से लगभग 2 ग्राम चूर्ण को लगभग 40 दिनों तक नियमित रूप से फांकने के बाद ऊपर से दूध पीने से वीर्य गाढ़ा होता है और शीघ्रपतन की शिकायत दूर हो जाती है।

* बरगद के पके हुए फलों को छाया में सुखाकर चूर्ण बना लें और इसमें मिश्री मिलाकर रख लें। इस चूर्ण को 5 ग्राम की मात्रा में रोजाना शाम को दूध के साथ लेने से एक सप्ताह के बाद ही वीर्य गाढ़ा होना शुरू हो जाता है। इस चूर्ण को लगभग 40 दिनों तक सेवन किया जा सकता है।

* लगभग आधा किलो देशी फूल की कच्ची कलियों को डेढ़ लीटर पानी में डालकर उबाल लें। पानी उबलने के बाद जल जाने पर इस मिश्रण को बारीक पीसकर 5-5 ग्राम की गोलियां बनाकर एक कांच के बर्तन में रखकर ऊपर से ढक्कन लगा दें। इसमें से 1 गोली को रोजाना सुबह के समय दूध के साथ लेने से संभोग करने की शक्ति बढ़ती है और वीर्य भी मजबूत होता है।

* लगभग 10 ग्राम बिदारीकंद के चूर्ण को गूलर के रस में मिलाकर चाट लें। इसके ऊपर से घी मिला हुआ दूध पीने से जो व्यक्ति संभोग क्रिया में पूरी तरह से सक्षम नहीं होते उनके शरीर में भी यौन शक्ति का संचार होने लगता है।

* देशी फूल की तुरंत उगी अर्थात नई कोंपलों को सुखाकर और पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को रोजाना 6 ग्राम की मात्रा में फांककर ऊपर से मिश्री मिला हुआ दूध पीने से वीर्य पुष्ट होता है। इसके अलावा इसका सेवन करने से पेशाब के साथ वीर्य का आना और स्वप्नदोष जैसे रोग भी दूर हो जाते हैं।

* चिरौंजी, मुलहठी और दूधिया बिदारीकंद को बराबर मात्रा में एक साथ मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को लगभग 1 सप्ताह तक लेने से और ऊपर से दूध पीने से वीर्य के सारे दोष दूर होते हैं और वीर्य बढ़ जाता है।

* सोंठ, सतावर, गोरखमुंडी, थोड़ी सी हींग और देशी खांड को एक साथ मिलाकर सेवन करने से लिंग मजबूत और सख्त होता है और बुढ़ापे तक ऐसा ही रहता है। इसके अलावा इसको लेने से वीर्य बढ़ता है और शीघ्रपतन जैसे रोग दूर हो जाते हैं। इस चूर्ण का सेवन करते समय गुड़ और खट्टे पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।

* सिंघाड़े के आटे का हलुआ, उड़द और चने की दाल का हलुआ, अंडों की जर्दी का गाय के घी में तैयार किया हुआ हलुआ, मेथी और उड़द की दाल के लडडू, आंवले की चटनी, गेहूं, चावल, बराबर मात्रा में जौ और उड़द का आटा और उसमें थोड़ी सी पीपल को डालकर तैयार की गई पूडि़यां और नारियल की खीर आदि का सेवन करने से हर तरह के धातु रोग नष्ट हो जाते हैं, वीर्य पुष्ट होता है और संभोग करने की शक्ति बढ़ती है।

लिंग को कैसे पुष्‍ट करें : 

* सुअर की चर्बी और शहद को बराबर मात्रा में एक साथ मिलाकर लिंग पर लेप करने से लिंग में मजबूती आती है।

* हींग को देशी घी में मिलाकर लिंग पर लगा लें और ऊपर से सूती कपड़ा बांध दें। इससे कुछ ही दिनों में लिंग मजबूत हो जाता है।

* भुने हुए सुहागे को शहद के साथ पीसकर लिंग पर लेप करने से लिंग मजबूत और शक्तिशाली हो जाता है।

* जायफल को भैंस के दूध में पीसकर लिंग पर लेप करने के बाद ऊपर से पान का पत्ता बांधकर सो जाएं। सुबह इस पत्ते को खोलकर लिंग को गर्म पानी से धो लें। इस क्रिया को लगभग 3 सप्ताह करने से लिंग पुष्ट हो जाता है।

* शहद को बेलपत्र के रस में मिलाकर लेप करने से हस्तमैथुन के कारण होने वाले विकार दूर हो जाते हैं और लिंग मजबूत हो जाता है।

* रीठे की छाल और अकरकरा को बराबर मात्रा में लेकर शराब में मिलाकर खरल कर लें। इसके बाद लिंग के आगे के भाग को छोड़कर लेप करके ऊपर से ताजा साबुत पान का पत्ता बांधकर कच्चे धागे से बांध दें। इस क्रिया को नियमित रूप से करने से लिंग मजबूत हो जाता है।

* बकरी के घी को लिंग पर लगाने से लिंग मजबूत होता है और उसमें उत्तेजना आती है।

* बेल के ताजे पत्तों का रस निकालकर उसमें शहद मिलाकर लगाने से लिंग में ताकत पैदा हो जाती है।

* धतूरा, कपूर, शहद और पारे को बराबर मात्रा में मिलाकर और बारीक पीसकर इसके लेप को लिंग के आगे के भाग (सुपारी) को छोड़कर बाकी भाग पर लेप करने से संभोग शक्ति तेज हो जाती है।

* असगंध, मक्खन और बड़ी भटकटैया के पके हुए फल और ढाक के पत्ते का रस, इनमें से किसी भी एक चीज का प्रयोग लिंग पर करने से लिंग मजबूत और शक्तिशाली बनता है।

* पालथ लंगी का तेल, सांडे का तेल़, वीर बहूटी का तेल, मोर की चर्बी, रीछ की चर्बी, दालचीनी का तेल़, आधा भाग लौंग का तेल, 4 भाग मछली का तेल को एकसाथ मिलाकर कांच के चौड़े मुंह में भरकर रख लें। इसमें से 8 से 10 बूंदों को लिंग पर लगाकर ऊपर से पान के पत्ते को गर्म करके बांध लें। इस क्रिया को लगातार 1 महीने तक करने से लिंग का ढीलापन समाप्त हो जाता है़, लिंग मजबूत बनता है। इस क्रिया के दौरान लिंग को ठंडे पानी से बचाना चाहिए।

विशेष जानकारी :

लिंग की मालिश या लेप करते समय एक बात का ध्यान रखें कि लिंग के मुंह के नीचे सफेद रंग का बदबूदार मैल जमा हो जाता है। इस मैल को समय-समय ठंडे पानी से धोकर साफ करते रहने चाहिए।

कामशक्ति बढ़ाने वाली मलहम :

* हीरा हींग को शुद्ध शहद में मिलाकर लिंग पर लेप करने से शीघ्रपतन का रोग जल्दी दूर हो जाता है। लिंग पर इस मलहम अर्थात लेप को लगाने के बाद शीघ्रपतन से ग्रस्त रोगी अपनी मर्जी से स्त्री के साथ संभोग करने का समय बढ़ा सकता है।

* 10 ग्राम दालचीनी का तेल और 30 ग्राम जैतून के तेल को एक साथ मिलाकर लिंग पर लेप करते रहने से शीघ्रपतन की शिकायत दूर हो जाती है, संभोग करने की शक्ति बढ़ती है। इस क्रिया के दौरान लिंग को ठंडे पानी से बचाना चाहिए।

* काले धतूरे की पत्तियों के रस को टखनों पर लगाकर सूखने के बाद संभोग करने से संभोगक्रिया पूरी तरह से और संतुष्टि के साथ संपन्न होती

परिचय : कोई भी स्त्री या पुरुष जब दूसरे लिंग के प्रति आर्कषण महसूस करने लगता है तो उसी समय से सेक्स उनके लिए एक बहुत ही खास विषय बन जाता है। उनके मन में सेक्स के बारे में जानने की उत्सुकता बढ़ जाती है और शादी से पहले यह लोग सेक्स करने से भी पीछे नहीं हटते। सेक्स करने में जितना आनंद मिलता है उतनी ही उसके प्रति संवेदनशीलता बनी रहती है। इसी वजह से चाहे स्त्री हो या पुरुष दोनों में ही सेक्स के प्रति हमेशा एक भूख सी रहती है वह ज्यादा से ज्यादा सेक्स का मजा लेना चाहता है।

ऐसे बहुत से लोग हैं जो सेक्स का मजा लेना चाहते हैं लेकिन सेक्स करते समय वह कुछ ही देर में ठंडे हो जाते हैं। ऐसे मामलों में उनके मन में यह बात घर कर जाती है कि उन्हें शीघ्रपतन का रोग है। ऐसे लोग वैसे तो पूरी तरह से स्वस्थ होते हैं लेकिन दिमागी रूप से बीमार हो जाते हैं। उनके मन में यह विचार भी आने लगते हैं कि अगर मैं संभोगक्रिया के समय अपने पार्टनर को संतुष्ट नहीं कर पाता तो वह मुझसे नफरत करने लग सकता है या मुझे छोड़कर जा सकता है।

यह एक ऐसी दिमागी समस्या है जिसके कारण आज लगभग हर वर्ग का व्यक्ति परेशान है। संभोगक्रिया के समय जब पुरुष का वीर्य निकल जाता है तभी उसकी संभोगक्रिया और संतुष्टि का चक्र पूरा हो गया मान लिया जाता है क्योंकि चरम आनंद के साथ ही वीर्य के निकलने का संबंध भी जुड़ा है लेकिन इसके बाद भी पुरुष की अंदर की प्यास नहीं बुझती। इसी वजह से वह अंदर ही अंदर शर्मिंदगी से घुटता रहता है।

यह कोई रोग नहीं है इसमें अगर पुरुष सही तरह से और सही तरीके से संभोग करे तो वह इस क्रिया को इच्छा के अनुसार बढ़ा सकता है। इसके लिए उसे किसी तरह की दवा आदि न खाकर और उल्टे-सीधे नीम हकीमों के चक्कर में न पड़कर सिर्फ कुछ खास बातों की ओर ध्यान देने की जरुरत है।

संभोग करते समय जल्दबाजी न करें :

संभोग करते समय किसी भी तरह की जल्दी करना या हड़बड़ाहट मचाना जल्दी वीर्यपात का कारण बनता है। किसी भी पति और पत्नी के बीच सेक्स संबंध सिर्फ खानापूर्ति के लिए या किसी भी काम को जल्दी से निपटाने के मकसद से नहीं होने चाहिए। ऐसे बहुत से व्यक्ति होते हैं जो संभोग करते समय तुरंत ही पूरे जोश में आ जाते हैं। उनकी उत्तेजना समय से पहले ही चरम सीमा तक पंहुच जाती है और जल्दी ही उनका वीर्यपात हो जाता है। कुछ समय में ही पुरुषों की ऐसी आदत से उनकी पत्नियां भी परेशान रहने लगती हैं क्योंकि उनको भी अपने पति की आदत से सेक्स में पूरी तरह से संतुष्टि नहीं मिल पाती है। इसलिए पुरुषों को संभोग करते समय किसी तरह की जल्दबाजी न करके धैर्यपूर्वक इस क्रिया को करनी चाहिए। इससे न सिर्फ पुरुष इस क्रिया को लंबा और संतुष्टि के साथ कर सकता है बल्कि स्त्री को पूरी तरह से यौन संतुष्टि मिलती है।

उत्तेजना पर ध्यान :

पुरुष को अगर अपनी संभोगक्रिया को काफी देर तक करना चाहता है तो उसे अपनी उत्तेजना का खासतौर पर ध्यान रखना जरूरी है। संभोगक्रिया के समय उत्तेजना का बढ़ना और काफी समय तक रहना पुरुष की शारीरिक क्रियाओं पर निर्भर करता है। जैसे ही महसूस हो कि शरीर में उत्तेजना बढ़ रही है, लिंग सख्त होता जा रहा है तो उसी समय अपनी शारीरिक क्रियाएं बंद कर देनी चाहिए, एकदम से शांत हो जाए। इससे बढ़ी हुई उत्तेजना सामान्य होने लगती है। अगर उत्तेजना ज्यादा बढ़ जाती है और शारीरिक आघात जारी रहते हैं तो वीर्य को निकलने से रोक पाना संभव नहीं हो पाता। इसलिए उत्तेजना को ज्यादा नहीं बढ़ने देना चाहिए।

वातावरण का ध्यान :

संभोगक्रिया करते समय वातावरण का भी खासतौर पर ध्यान देना पड़ता है। संभोगक्रिया में पूरी तरह आनंद और संतुष्टि तब तक नहीं मिल पाती जब तक इस क्रिया को बिना किसी डर के और निश्चिंत होकर न किया जाए। शादी के बाद सोने के लिए पति और पत्नी के लिए अलग से कमरे की व्यवस्था कर दी जाती है फिर भी कई बार इस व्यवस्था में अचानक किसी तरह की रुकावट आ जाती है तो ऐसे में उन्हें सेक्स संबंध नहीं बनाने चाहिए। कई बार पति-पत्नी अपने कमरे में आकर संभोगक्रिया करने लगते हैं तभी उन्हें अगर कोई आवाज दे देता है तो उस समय उनकी सेक्स संबंधों के दौरान बनी मानसिकता को तेज आघात पहुंचता है और यही जल्दी वीर्यपात का कारण बनता है। अगर पति और पत्नी अपने कमरे में आते हैं तो उन्हें तुरंत ही संभोगक्रिया में नहीं लग जाना चाहिए। कमरे में आते ही सबसे पहले आपस में किसी भी टाँपिक को लेकर बातें आदि करने लग जाएं। जैसे ही लगे कि अब घर में सब लोग सो गए हैं तब संभोगक्रिया करने के लिए तैयार हो जाए। कमरे में हरे रंग या आसमानी रंग का बल्ब जलाकर संभोगक्रिया करने से आनंद मिलता है।

संभोगक्रिया के समय विभिन्न आसनों का प्रयोग हानिकारक है :

संभोगक्रिया के समय बहुत से पुरुष अपनी बीवियों को सेक्स के अलग-अलग आसनों को प्रयोग करने की प्रयोगशाला बना देते हैं। पुरुष अक्सर किताबों या फिल्मों में सेक्स करने के अलग-अलग तरीकों को देखकर अपनी पत्नी के साथ भी उसी तरह सेक्स करने के लिए जोर डालते हैं। लेकिन सेक्स करने के यह तरीके या आसन जो दिखाए जाते हैं उनको करना लगभग नामुनकिन होता है। इन अलग-अलग आसनों को करते समय या संबंध बनाते समय पुरुष इस कदर उत्तेजित हो जाते हैं कि उसके लिए संबंध बनाए रखना मुश्किल हो जाता है जिसकी वजह से वे शीघ्र स्खलित हो जाते हैं। पत्नी को भी ऐसा महसूस होता है कि उसका पति तो उसे किसी खिलौने की तरह प्रयोग कर रहा है जिसके कारण वह शारीरिक और दिमागी रूप से पीड़ित रहने लगती है। वैसे भी सेक्स संबंधों का जितना आनंद सामान्य आसन से मिलता है उतना अलग-अलग आसनों का प्रयोग करने से नहीं मिलता। बहुत से विद्वानों का कहना है कि जो व्यक्ति सामान्य आसनों का प्रयोग करके सेक्स संबंधों का आनंद उठा रहा है उन्हें भूलकर भी अलग-अलग आसनों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इसके लिए सबसे अच्छा आसन है कि संभोगक्रिया के समय पत्नी को नीचे और पति को उसके ऊपर लेटना चाहिए। इस आसन को करते समय पुरुष का लिंग बहुत ही आसानी के स्त्री की योनि में प्रवेश कर जाता है और पुरुष संभोग के समय स्त्री के चेहरे के भावों को पढ़ सकता है। विराम के समय स्त्री के शरीर पर निश्चल लेटने से एक अनोखा सुख प्राप्त होता है।

इसके बाद सिर्फ विपरीत रति वाले आसन को ही अच्छा माना गया है। इस आसन में पति नीचे लेटता है और पत्नी उसके ऊपर लेटती है। इसमें शरीर संचालन स्त्री और पुरुष दोनों मिलकर कर सकते हैं। इस आसन में भी सारी स्थितियां पहले आसन के ही जैसी होती हैं लेकिन विराम के समय आराम का सुख स्त्री को ही मिलता है। इन दोनों आसनों की खासियत यह है कि इसमें जब तक संभोगक्रिया चलती है तब तक बिना किसी परेशानी के चलती है। दूसरे किसी आसन में यह सुविधा नजर नहीं आती है। बाकी सारे आसनों में जो कमी नजर आती है वह यह है कि उनमें संभोग और विराम काल में स्त्री-पुरुष एक-दूसरे के सीने से लगकर आनंद नहीं उठा पाते। दूसरे आसनों में लिंग योनि में इतनी आसानी से प्रवेश नहीं कर पाता जितनी आसानी से पहले वाले आसन में हो जाता है। कई बार लिंग को योनि में प्रवेश कराने से पुरुष की उत्तेजना इतनी बढ़ जाती है कि योनि में प्रवेश के साथ ही पुरुष का वीर्य निकल जाता है। इसके लिए सबसे अच्छा उपाय यह है कि जो व्यक्ति शीघ्रपतन रोग से ग्रस्त होता है उन्हें पहले वाले आसन में ही संभोग करना चाहिए।

संभोगक्रिया में अपने आप पर काबू रखें :

सेक्स और संयम का आपस में बहुत ही गहरा संबंध है। बिना संयम के संभोगक्रिया चल ही नहीं सकती। वैसे भी कहते है कि संयम ही सेक्स की धुरी है और संयम हर क्रिया में बहुत जरूरी है। युवा वर्ग के लिए संयम रखना बहुत जरूरी है। बहुत से व्यक्ति जब देखते हैं कि घर में कोई नहीं है तो वह तुरंत ही मौके का फायदा उठाकर अपनी पत्नी के साथ संबंध बनाना चाहते हैं और तुरंत ही जल्दबाजी में संबंध लेते हैं। पत्नी भी इस चीज का विरोध नहीं कर पाती। इस प्रकार संबंध बनाते समय पुरुष की उत्तेजना शुरुआती दौर में ही चरम की स्थिति तक पंहुच जाती है। फिर किसी के आ जाने का डर उसे सबकुछ जल्दी-जल्दी करने पर मजबूर कर देती है। ऐसे समय में पुरुष का नाता संयम से बिल्कुल टूट जाता है और वीर्य जल्दी ही निकल जाता है। इसके अलावा और भी कई मौके आते हैं जब पति अपनी पत्नी के साथ संबंध बनाने का मौका छोड़ना नहीं चाहता जिसके कारण व्यक्ति शीघ्र स्खलन का शिकार हो जाता है। इसलिए थोड़े से मजे के चक्कर में अपने आपको शीघ्र स्खलन का रोगी न बनने दें। अगर इस स्थिति को संभाला नहीं जाता तो संभोग के नाम पर पुरुष सिर्फ स्खलन की क्रिया ही पूरी करेगा। इसमें स्त्री को संतुष्टि सिर्फ नाम के लिए ही मिल पाती है। इसलिए सेक्स के समय संयम के महत्व को समझना बहुत जरूरी है।

सांसों को सयंमित रखें :

संभोग करते समय सांसों की गति को सयंमित रखकर चरम की तरफ तेजी से बढ़ती हुई उत्तेजना को कम किया जा सकता है। उत्तेजना के बढ़ने पर जब आपको महसूस हो कि आपके न चाहते हुए भी आपका वीर्यपात होने को है तो उसी समय अपनी शारीरिक गतिविधियों को बंद कर देना चाहिए। शरीर को एकदम ढीला छोड़ दें और आंखे बंद करके लंबी सांस भरें। सांस को एकदम से बाहर नहीं छोड़ना चाहिए। जितना समय सांस को लेने में लगे उससे दुगने समय तक सांस को रोककर रखना चाहिए। सांस को छोड़कर फिर थोड़ी देर तक रुकना चाहिए। इसके बाद दुबारा जितनी लंबी सांस ले सकते हैं लें। सांस लेकर कुछ देर तक रुकें और फिर धीरे-धीरे सांस को छोड़े। 2-3 बार ऐसा करने से बढ़ी हुई उत्तेजना धीरे-धीरे कम होने लगती है। ऐसा करने में अगर व्यक्ति सफल हो जाता हो तो उसके सेक्स संबंधों के समय में बढ़ोत्तरी होती जाती है।

प्राक-क्रीड़ा को लंबा न खींचे :

कुदरत ने स्त्री के शरीर को इस प्रकार का बनाया है कि उसे देखते ही पुरुष के शरीर में उत्तेजना बढ़ने लगती है। शादी से पहले अगर कोई व्यक्ति किसी लड़की से संबंध नहीं बनाता तो स्त्री के शरीर को छूने की और देखने की लालसा उसमें बढ़ती रहती है। ऐसा ही बिल्कुल स्त्री के साथ भी होता है। पुरुष स्त्री के शरीर को देखता है़ उसके अंगों को सहलाता है, आलिंगन करता है, उसके शरीर को चूमता है आदि। इसी के साथ वह चाहता है कि स्त्री भी उसके उसके शरीर के साथ वैसा ही करे जैसा वह करता है और वह स्त्री को ऐसा करने के लिए उकसाता है यही प्राक-क्रीड़ा होती है। इन सभी क्रियाओं में स्त्री इतनी ज्यादा उत्तेजित नहीं होती जितना कि पुरुष हो जाता है। स्त्री के शरीर से छेड़छाड़ करने से या अपने गुप्तांग को स्त्री के हाथों से छुआने से, संभोग करने से पहले ही पुरुष की उत्तेजना इतनी तेज हो जाती है कि वह स्त्री के साथ संभोग करने से पहले ही अनिंयत्रित उत्तेजना का शिकार होकर ठंडा पड़ जाता है जिसके कारण स्त्री भी अपनी संभोग करने की इच्छा को मन में ही दबाकर रह जाती है। इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि शारीरिक उत्तेजना को ज्यादा लंबा न खींचे। प्राक-क्रीड़ा संभोग करने की क्रिया को शुऱू करने का एक जरुरी हिस्सा है लेकिन इसी में ही अपनी ऊर्जा को खर्च नहीं कर देना चाहिए।

इस बारे में एक बात ध्यान रखना और भी जरूरी है कि पुरुष को स्त्री से अपने गुप्तांग को उत्तेजित नहीं करना चाहिए क्योंकि संभोगक्रिया करने के लिए स्त्री को तैयार होने में थोड़ा समय लगता है जबकि पुरुष उससे जल्दी उत्तेजित हो जाता है। संभोगक्रिया में लिंग मुंड की बहुत ही खास भूमिका होती है। लिंग मुंड की त्वचा बहुत ही संवेदनशील होती है। स्त्री द्वारा इसे ज्यादा छूने से संभोग करने से पहले ही व्यक्ति की उत्तेजना चरम सीमा पर पंहुचने लगती है। जब संभोग किया जाता है तो पुरुष आगे बढ़ने के स्थान पर वहीं ढेर हो जाता है। जिन लोगों की उत्तेजना बहुत तेजी से भड़कती है उन्हें शारीरिक छेड़छाड़ से बचना चाहिए। अगर पुरुष इस बात का ध्यान रखें तो सेक्स संबंधों के दौरान मिलने वाले आनंद की सीमा को बढ़ाया जा सकता है।

कुछ महान लोगों का मानना है कि जिस व्यक्ति की कामशक्ति कमजोर है उन्हें प्राक-क्रीड़ा से बचना चाहिए लेकिन ऐसा करने से स्त्री को सेक्स के लिए दिमागी रूप से तैयार होने में थोड़ी परेशानी महसूस हो सकती है। इसलिए ऐसे व्यक्तियों को प्राक-क्रीड़ा के समय अपने सारे कपड़े नहीं उतारने चाहिए। कुछ समय तक स्त्री के शरीर के अंगों से छेड़छाड़ करके काम चलाया जा सकता है। जब संबंध बनाने हो तभी अपने आखिरी कपड़े को उतारना चाहिए और सेक्स में लीन हो जाना चाहिए। अगर शुरू में ही सारे कपड़े उतार दिये जाते हैं तो स्त्री के शरीर से लिंग आदि की रगड़ लगने से उसकी संवेदनशीलता बढ़ जाती है जिसके कारण जल्द ही वीर्यपात हो जाता है। संभोग करते समय कमरे में ज्यादा रोशनी न करके हल्की रोशनी वाला बल्ब लगाना चाहिए।

संभोग के समय गंदी बातें न करें :

संभोगक्रिया के समय काफी लोगों की आदत होती है कि वह इस दौरान अश्लील और उत्तेजना बढ़ाने वाली बातें करते हैं और अपनी पत्नी से भी चाहते हैं कि वह भी उसी प्रकार की बातें करें। इससे एक तो पुरुष को मजा आता है और साथ ही उसकी उत्तेजना भी बढ़ने लगती है। इससे संभोग करने से पहले ही वह इतने उत्तेजित हो जाते हैं कि कुछ करने से पहले ही उनका वीर्यपात हो जाता है। इसलिए संभोग करने से पहले न तो खुद अश्लील बातें करें और न ही पत्नी को ऐसा करने के लिए उकसाएं।

संभोगक्रिया के समय किसी भी प्रकार की उत्तेजना बढ़ाने वाली बातें करने के स्थान पर विराम के समय पत्नी से ऐसी बातें करें जिनका कि सेक्स से कोई संबंध न हो। ऐसा करने से एक तो बढ़ती हुई उत्तेजना कम होती है और दूसरा जल्दी वीर्यपात होने का डर नहीं रहता तथा दूसरी बातों के कारण स्त्री भी रुचि लेकर बातचीत में साथ देगी। ऐसी बातें करने से आत्मीयता बढ़ती है। अगर कोई व्यक्ति सेक्स संबंधों को ज्यादा नहीं खींच पाते तो कहीं न कहीं उसका कारण अश्लील और उत्तेजना बढ़ाने वाली बातचीत हो सकती है।

संभोगक्रिया के समय नशीले पदार्थों के सेवन से बचे :

बहुत से लोग सोचते हैं कि अगर नशीले पदार्थों का सेवन करके सेक्स किया जाए तो यह क्रिया ज्यादा समय तक और आनंदमय हो जाती है। यही सोचकर वह इसे करने के लिए शराब, भांग, गांजा, अफीम या दूसरी किसी तेज चीज का सेवन करते हैं। लेकिन इससे बस थोड़ी देर के लिए ही उत्तेजना पैदा होती है और जितनी तेजी से पैदा होती है उतनी ही तेजी से खत्म हो जाती है। नशा करके सेक्स करने वालों की कामशक्ति धीरे-धीरे कम होने लगती है और उनकी ऊर्जा समय से पहले ही समाप्त हो जाती है। इसके अलावा नशा करके सेक्स करने वालों का बर्ताव भी जानवरों जैसा हो जाता है। उसमें अच्छा-बुरा पहचान करने की क्षमता खत्म हो जाती है और वह अपनी पत्नी को जानवरों की तरह नोचने लगता है। पत्नी अपने पति के इस व्यवहार से प्रताड़ित होकर संभोगक्रिया का आनंद लेने के बजाय अपने आपको पति से पीछा छुड़ाने के उपाय ढूंढती रहती है। इसलिए मन से ऐसे विचारों को तुरंत ही निकाल देना चाहिए कि नशा संभोग करने की शक्ति को बढ़ाता है।

तनावमुक्त रहे :

आज के समय में हर इंसान किसी न किसी तनाव से घिरा हुआ है चाहे वह तनाव खाने से संबंधित हो, सोने से संबंधित हो, दिमाग से संबंधित हो या शरीर से संबंधित हो। यही तनाव व्यक्ति की सेक्स पाँवर पर भी असर डालता है। व्यक्ति का कोई भी काम तनाव की हालत में हो सकता है लेकिन संभोगक्रिया तनाव के साथ नहीं हो सकती। अगर किसी व्यक्ति को बहुत ज्यादा तनाव होता है तो उसका शारीरिक संबंधों की तरफ ध्यान ही नहीं होता। अगर वह किसी प्रकार से अपने आपको इन संबंधों के लिए तैयार कर लेता है तो उसका शरीर साथ नहीं देता, अगर जैसे-तैसे शरीर को तैयार कर लिया जाता है तो जल्दी वीर्यपात हो जाने के कारण संभोगक्रिया का पूरा मजा खराब हो जाता है। इस समस्या से आज के समय में बहुत से युवक ग्रस्त हैं वह खुद मानते हैं कि इसका सबसे बड़ा कारण तनाव होता है। तनाव उनकी जिंदगी का ऐसा हिस्सा बन गया है कि बाहर निकलने का नाम ही नहीं लेता।

संभोग शक्ति बढ़ाना-वाजीकरण :

यौनसुख अर्थात संभोग क्रिया के समय चरम सुख की प्राप्ति होना बहुत ही आनंददायक होता है। इसकी तुलना बहुत से विद्वानों ने स्वर्ग के सुख से की है। हर मनुष्य पूरे जीवन इस सुख को भोगना चाहता है। मनुष्य कभी भी काम अर्थात सेक्स से मुक्त नहीं होना चाहता। यही उसके जीवन का प्राथमिक बिंदु है। काम अर्थात सेक्स की शक्ति परमात्मा की शक्ति है इसलिए तो काम अर्थात सेक्स से शरीर में ऊर्जा पैदा होती है इसलिए मनुष्य को पूरी तरह से काम-शक्ति संपन्न होना चाहिए।

लेकिन आज के आधुनिक युग में युवा पीढ़ी पर काम का बोझ, एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़, मानसिक तनाव, विषाद, नशे की लत, पश्चिमी सभ्यता को अपनाने की लालसा, अप्राकृतिक मैथुन, एलोपैथिक दवाईयों के दुष्परिणाम, खान-पान में अनिमियता बरतना, दूषित वातावरण और बढ़ती हुई कामवासना के कारण उम्र से पहले ही यौनशक्ति की कमी से पीड़ित होते जा रहे हैं। कामशक्ति की कमी से ग्रस्त युवकों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही है।

वाजीकरण क्या है-सेक्स और वीर्य का आपस में बहुत ही गहरा संबंध है। हर युवक चाहता है कि स्त्री के साथ संभोग करते समय वीर्यस्खलन देर से हो। इसके लिए व्यक्ति हमेशा ही नई-नई चीजें ढूंढता रहता है। अपनी यौनशक्ति को बढ़ाने के लिए मनुष्य हर समय कोशिश करता रहता है इसके साथ ही वह अपनी संभोग शक्ति बढ़ाने के लिए भी प्रयत्नशील रहता है। पुरुष के मन में हमेशा यह इच्छा रहती है कि वह सदा जवान रहे और वह स्त्री के साथ पूरे जोश के साथ सेक्स करता रहूं। प्रौढ़ावस्था की ओर बढ़ता पुरुष भी हमेशा संभोगशक्ति बढ़ाने वाले उपाय तलाशता रहता है।

बहुत से लोगों की यह धारणा बनी हुई है कि एक वीर्यवान पुरुष ही स्त्री को संभोग क्रिया के समय पूरी तरह से चरमसुख तक पहुंचा सकता है। संभोगशक्ति को बढ़ाने के लिए वीर्य को शुद्ध, गाढ़ा, और शुक्राणुओं की वृद्धि, स्तंभन शक्ति बढ़ाने के लिए आयुर्वेद के विद्वानों ने वाजीकरण नाम के अलग विभाग की रचना की है। उनके हिसाब से वीर्य को बढ़ाने के लिए, वीर्य से संबंधित दोषों को दूर करने के लिए, संभोग शक्ति और स्तंभन शक्ति बढ़ाने के लिए वाजीकरण औषधि का सेवन करना बहुत जरूरी है। वाजीकरण को वृष्य भी कहते हैं। इसलिए मनुष्य के शरीर में जिन खाद्य पदार्थों, यौगिक क्रियाओं या औषधियों के द्वारा शक्ति प्राप्त होती है उसे वाजीकरण के नाम से जाना जाता है।

वाजीकरण की जरूरत- दुनिया में हर स्त्री और पुरुष सेक्स के लिए बराबर रूप से समर्थ नहीं होते हैं और हर कोई संतान पैदा करने में सक्षम नहीं हो पाते हैं। जैसे कि बहुत से पुरुष शरीर से तो बहुत ही हष्ट-पुष्ट और ताकतवर होते हैं लेकिन फिर भी वह संभोगशक्ति में कमजोर होते हैं। इन्हीं के विपरीत बहुत से पुरुष दुबले-पतले शरीर वाले होते हुए भी बहुत तेज संभोग शक्ति वाले और स्त्री को संतुष्ट करने वाले होते हैं। बहुत से पुरुष स्वभाव से ही सेक्स करने में कमजोर होते हैं और इस क्रिया में कुछ ही देर में थक जाते हैं। लेकिन बहुत से पुरुष संभोग शक्ति को ज्यादा लंबे समय तक ले जाने वाले होते हैं। कुछ पुरुष वाजीकरण औषधियों के सेवन से संभोग क्रिया में सफल होते हैं तो कुछ इस क्रिया का बार-बार अभ्यास करने से इस क्रिया को सफल बनाते हैं। बहुत से पुरुष कम वीर्य वाले होते हैं तो कुछ संभोग क्रिया के समय देर से उत्तेजित होने वाले होते हैं। ऐसे पुरुषों में काम-उत्तेजना सोई हुई अवस्था में होती है जिसे स्त्री के नग्न शरीर के अंगों को देखकर, चुंबन, आलिंगन, सेक्स के बारे में बातचीत और नग्न तसवीर आदि के द्वारा जागृत किया जाता है। ऐसे पुरुषों को संभोग क्रिया में तुरंत उत्तेजित करने के लिए वाजीकरण औषधियों का सेवन कराना जरूरी होता है।

वाजीकरण का सेवन करने के लिए जरूरी बातें :

आयुर्वेद में बताया गया है कि कम उम्र के बच्चों और ज्यादा उम्र के पुरुषों को वाजीकरण औषधि का सेवन नहीं करना चाहिए। इनका सेवन लगभग 16 से 50 साल तक की उम्र के लोगों को करना चाहिए। क्योंकि यही उम्र सेक्स करने के लिए सबसे ज्यादा अच्छा होता है। 16 साल से कम उम्र में या 50 साल से ज्यादा की उम्र में सेक्स करना बेकार होता है क्योंकि बाल्यकाल (युवावस्था से पहले की उम्र) में शरीर की धातुएं (वीर्य, शुक्राणु) पूरी तरह से विकसित नहीं होते हैं और अगर ऐसे में वह स्त्री के साथ संभोग क्रिया करता है तो वह उसके लिए व्यर्थ ही होता है और कभी-कभी हानिकारक भी हो जाता है।

इसी तरह से 50 साल की उम्र अर्थात वृद्धावस्था में शरीर की सारी धातुएं (वीर्य, शुक्राणु) कमजोर हो जाती हैं। कमजोर शरीर वाला, कमजोर हड्डियों वाला व्यक्ति अगर किसी स्त्री के साथ संभोग करने में लग जाता है तो वह इसमें कुछ पाने के बजाय अपने शरीर का नाश करवा लेता है। रसायन औषधि के सेवन से जहां नए यौवन की प्राप्ति होती है वही वाजीकरण औषधियों के सेवन से यौनसुख मिलता है। जिस व्यक्ति का मन उसके वश में रहता है वह हमेशा वाजीकरण औषधि का सेवन कर सकता है।

वाजीकरण द्रव्य :

दूध-आयुर्वेद के अनुसार दूध को सबसे ज्यादा उपयोगी वाजीकरण औषधि का नाम दिया गया है। दूध वीर्य की वृद्धि करने वाला, काम-शक्ति को बढ़ाने वाला और शरीर की खोई हुई ताकत को दुबारा पैदा करने में प्रभावशाली होता है। अगर स्त्री के साथ संभोग करने से पहले गर्म दूध पी लिया जाए तो इससे यौनशक्ति बढ़ती है, संभोग के प्रति मन में इच्छा पैदा होती है, पूरी मात्रा में वीर्य स्खलन होता है। वहीं अगर संभोग करने के बाद गर्म और मीठा दूध पीने से संभोग करने के समय खर्च हुई शक्ति दुबारा मिलकर व्यक्ति की थकान दूर हो जाती है। इसलिए संभोग करने के पहले और बाद में हमेशा दूध पीना चाहिए।

उड़द-उड़द के लड्डू, उड़द की दाल, दूध में बनाई हुई उड़द की खीर का सेवन करने से वीर्य की बढ़ोतरी होती है और संभोग शक्ति बढ़ती है।

अंडा-अंडे के अंदर वीर्य को बढ़ाने की बहुत ज्यादा क्षमता होती है। दूध के अंदर अंडे की जर्दी मिलाकर पीने से वीर्य बढ़ता है और संभोग करने की शक्ति भी तेज होती है। वैसे तो ज्यादातर लोग मुर्गी और मोरनी के अंडों का सेवन करते ही हैं लेकिन इनके अलावा चिड़िया के अंडों को भी बहुत ज्यादा वाजीकरण औषधि के रूप में गिना जाता है।

तालमखाना-तालमखाना ज्यादातर धान के खेतों में पाया जाता है इसे लेटिन भाषा में एस्टरकैन्था-लोंगिफोलिया कहते हैं। वीर्य के पतले होने पर, शीघ्रपतन रोग में, स्वप्नदोष होने पर, शुक्राणुओं की कमी होने पर रोजाना सुबह और शाम लगभग 3-3 ग्राम तालमखाना के बीज दूध के साथ लेने से लाभ होता है। इससे वीर्य गाढ़ा हो जाता है।

गोखरू-गोखरू का फल कांटेदार होता है और औषधि के रूप में काम आता है। बारिश के मौसम में यह हर जगह पर पाया जाता है। नपुंसकता रोग में गोखरू के लगभग 10 ग्राम बीजों के चूर्ण में इतने ही काले तिल मिलाकर 250 ग्राम दूध में डालकर आग पर पका लें। पकने पर इसके खीर की तरह गाढ़ा हो जाने पर इसमें 25 ग्राम मिश्री का चूर्ण मिलाकर सेवन करना चाहिए। इसका सेवन नियमित रूप से करने से नपुसंकता रोग में बहुत ही लाभ होता है।

इसके अलावा गोखरू का चूर्ण, आंवले का चूर्ण, नीम और गिलोय को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें। इस बने हुए चूर्ण को रसायन चूर्ण कहा जाता है। इस चूर्ण को रोजाना 3 बार 1-1 चम्मच की मात्रा में दूध या ताजे पानी के साथ लेने से नपुंसकता, संभोग करने की इच्छा न करना, वीर्य की कमी होना, प्रमेह, प्रदर और मूत्रकृच्छ जैसे रोगों में लाभ होता है।

मूसली-मूसली पूरे भारत में पाई जाती है। यह सफेद और काली दो प्रकार की होती है। काली मूसली से ज्यादा गुणकारी सफेद मूसली होती है। यह वीर्य को गाढ़ा करने वाली होती है।

मूसली के चूर्ण को लगभग 3-3 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम दूध के साथ लेने से वीर्य की बढ़ोत्तरी होती है और शरीर में काम-उत्तेजना की वृद्धि होती है।

इसके अलावा मूसली के लगभग 10 ग्राम चूर्ण को 250 ग्राम गाय के दूध में मिलाकर अच्छी तरह से उबालकर किसी मिट्टी के बर्तन में रख दें। इस दूध में रोजाना सुबह और शाम पिसी हुई मिश्री मिलाकर सेवन करने से लिंग का ढीलापन, शीघ्रपतन और संभोग क्रिया की इच्छा न करना, वीर्य की कमी होना आदि रोगों में बहुत लाभ मिलता है।

कौंच-कौंच को कपिकच्छू और कैवांच आदि के नामों से भी जाना जाता है। संभोग करने की शक्ति को बढ़ाने के लिए इसके बीज बहुत लाभकारी रहते हैं। इसके बीजों का सेवन करने से वीर्य की बढ़ोत्तरी होती है, संभोग करने की इच्छा तेज होती है और शीघ्रपतन रोग में लाभ होता है। इसके बीजों का उपयोग करने के लिए बीजों को दूध या पानी में उबालकर उनके ऊपर का छिलका हटा देना चाहिए। इसके बाद बीजों को सुखाकर बारीक चूर्ण बना लेना चाहिए। इस चूर्ण को लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम मिश्री के साथ दूध में मिलाकर सेवन करने से लिंग का ढीलापन और शीघ्रपतन का रोग दूर होता है।

कौंच के बीज, सफेद मूसली और अश्वगंधा के बीजों को बराबर मात्रा में मिश्री के साथ मिलाकर बारीक चूर्ण तैयार कर लें। इस चूर्ण में से एक चम्मच चूर्ण सुबह और शाम दूध के साथ लेने से लिंग का ढीलापन, शीघ्रपतन और वीर्य की कमी होना जैसे रोग जल्दी दूर हो जाते हैं।

सेमल-सेमल के पेड़ पूरे भारतवर्ष में पाए जाते हैं। इसको लेटिन भाषा में सालमालिया-माला-बारिका कहा जाता है। सेमल के गोंद को मोचरस कहा जाता है। यौनरोग होने पर सेमल की गोंद और जड़ का प्रयोग होता था।

लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में सेमल की जड़ के चूर्ण और मूसली के चूर्ण को रोजाना सुबह और शाम मीठे दूध के साथ सेवन करने से वीर्य की बढ़ोत्तरी होकर संभोग करने की शक्ति तेज होती है। स्वप्नदोष और शीघ्रपतन रोग से ग्रस्त रोगियों को सेमल की गोंद में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर लगभग 6-6 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम दूध और पानी के साथ सेवन करना चाहिए।

शतावरी-शतावरी को लेटिन भाषा में असपारगस-रेसेमेसस कहा जाता है। इसका पौधा उत्तर भारत में ज्यादा पाया जाता है। इसकी जड़ को औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है। शरीर में बल और वीर्य को बढ़ाने के लिए शतावरी की जड़ का चूर्ण लगभग 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम गर्म दूध के साथ लेना लाभकारी रहता है। इसे दूध में चाय की तरह पकाकर भी सेवन किया जा सकता है। यह औषधि स्त्रियों के स्तनों को बढ़ाने में लाभकारी रहती है। शतावरी के ताजे रस को 10 ग्राम की मात्रा में लेने से कुछ ही समय में वीर्य बढ़ता है।

विदारीकंद-विदारीकंद की बेल पूरे भारत में खासकर हिमालय की निचली पहाड़ियों, बंगाल, पंजाब, असम आदि स्थानों पर मिलती है। इसको लेटिन भाषा में Pueraria-Tuberosa कहा जाता है। विदारीकंद के चूर्ण को 5-5 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम असमान मात्रा के घी और शहद के साथ मिलाकर चाटने और ऊपर से गर्म दूध पीने से पुरुष की काम-शक्ति तेज हो जाती है। विदारीकंद बल और वीर्य बढ़ाने वाली औषधि है। इसके अलावा विदारीकंद के चूर्ण में इसी का ताजा रस मिलाकर लगभग 21 बार घोटें व डिब्बे में सुरक्षित रखें। इसमें से 5-5 ग्राम की मात्रा लेकर दिए गए तरीके से ही दूध के साथ सेवन करने से पुरुष का वीर्य बढ़ता है।

असगंध-असगंध को हिंदी भाषा में अश्वगंधा और लेटिन भाषा में Withania-Somnifera कहा जाता है। यह भारत में हर जगह पाई जाती है। राजस्थान के नागौर जिले में पाई जाने वाली असगंध, नागौरी असगंध के नाम से जानी जाती है। इसकी जड़ को औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है। अश्वगंधा का सेवन करने से शरीर में घोड़े की तरह संभोग करने की ताकत आ जाती है और इसके पौधे के अंदर से घोड़े की तरह गंध आती है इसलिए इसका नाम अश्वगंधा पड़ा है।

अश्वगंधा की जड़ के 3-3 ग्राम चूर्ण को दूध के साथ सेवन करने से शारीरिक शक्ति और संभोग करने की शक्ति तेज होती है। वीर्य की कमी होना, धातु की कमजोरी, उत्तेजना की कमी होना, मानसिक कमजोरी आदि रोगों में अश्वगंधा का सेवन करना लाभकारी होता है। जब शरीर में वीर्य की कमी होने लग जाती है तो इसके कारण याददाश्त कम होने लगती है, किसी काम में मन नहीं लगता है, शरीर में हर समय थकान सी बनी रहती है, स्त्री के साथ संभोग करने का मन नहीं करता, लिंग पूरी तरह से उत्तेजित नहीं हो पाता। इस तरह के लक्षणों में अश्वगंधा के चूर्ण को गाय के घी में मिलाकर चाटने और उसके ऊपर से गाय का गर्म-गर्म दूध पीना लाभकारी रहता है।

कुछ आसान वाजीकरण (संभोग शक्ति बढ़ाने वाले) योग :

  1. * शतावरी, गोखरू, तालमखाना, कौंच के बीज, अतिबला और नागबला को एकसाथ मिलाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर 2-2 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम दूध के साथ रोजाना सेवन करने से स्तंभन शक्ति तेज होती है और शीघ्रपतन के रोग में लाभ होता है। रात को संभोग क्रिया करने से 1 घंटा पहले इस चूर्ण को गुनगुने दूध के साथ सेवन करने से संभोग क्रिया सफलतापूर्वक संपन्न होती है। वीर्य का पतला होना, यौन-दुर्बलता और विवाह के बाद शीघ्रपतन होना जैसे रोगों में इसका सेवन बहुत लाभकारी रहता है।
  2. * मोचरस, कौंच के बीज, शतावरी, तालमखाना को 100-100 ग्राम की मात्रा में लेकर लगभग 400 ग्राम मिश्री के साथ मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को 2-2 चम्मच की मात्रा में सुबह और शाम दूध के साथ सेवन करने से बुढ़ापे में भी संभोग क्रिया का पूरा मजा लिया जा सकता है। इस योग को लगभग 2-3 महीने तक सेवन करना लाभकारी रहता है।
  3. * लगभग 6 चम्मच अदरक का रस, 8 चम्मच सफेद प्याज का रस, 2 चम्मच देशी घी और 4 चम्मच शहद को एक साथ मिलाकर किसी साफ कांच के बर्तन में रख लें। इस योग को रोजाना 4 चम्मच की मात्रा में सुबह खाली पेट सेवन करना चाहिए। इसको लगातार 2 महीने तक सेवन करने से स्नायविक दुर्बलता, शिथिलता, लिंग का ढीलापन, कमजोरी आदि दूर हो जाते हैं।
  4. * बबूल की कच्ची पत्तियां, कच्ची फलियां और गोंद को बराबर मात्रा में मिलाकर बारीक चूर्ण बना लें और इनमें इतनी ही मात्रा में मिश्री मिलाकर किसी डिब्बे आदि में रख लें। इस चूर्ण को नियमित रूप से 2 महीने तक 2-2 चम्मच की मात्रा में दूध के साथ सेवन करने से वीर्य की वृद्धि होती है और स्तंभन शक्ति बढ़ती है। इसके अलावा यह योग शीघ्रपतन और स्वप्नदोष जैसै रोगों में बहुत लाभकारी रहता है।
  5. * सफेद मूसली के चूर्ण और मुलहठी के चूर्ण को बराबर की मात्रा में मिला लें। इस चूर्ण को 1 चम्मच की मात्रा में सुबह और शाम शुद्ध घी के साथ मिलाकर चाट लें और ऊपर से गर्म दूध पी लें। इस योग को नियमित सेवन करने से धातु वृद्धि होती है, नपुंसकता दूर होती है और शरीर पुष्ट और शक्तिशाली बनता है।
  6. * 10-10 ग्राम धाय के फूल, नागबला, शतावरी, तुलसी के बीज, आंवला, तालमखाना और बोलबीज, 5-5 ग्राम अश्वगंध, जायफल और रूदन्तीफल, 20-20 ग्राम सफेद मूसली, कौंच के बीज और त्रिफला तथा 15-15 ग्राम त्रिकटु, गोखरू को एक साथ जौकुट करके चूर्ण बना लें। इसके बाद इस मिश्रण के चूर्ण को लगभग 16 गुना पानी में मिलाकर उबालने के लिए रख दें। उबलने पर जब पानी जल जाए तो इसमें 10 ग्राम भांगरे का रस मिलाकर दुबारा से उबाल लें। जब यह पानी गाढ़ा सा हो जाए तो इसे उतारकर ठंडा करके कपड़े से अच्छी तरह मसलकर छान लें और सुखाकर तथा पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में 20 ग्राम शोधी हुई शिलाजीत, 1 ग्राम बसन्तकुसूमाकर रस और 5 ग्राम स्वर्ण बंग को मिला लें। इस औषधि को आधा ग्राम की मात्रा में शहद के साथ मिलाकर सुबह-शाम चाटकर ऊपर से गर्म दूध पी लें। इस औषधि को सेवन करने से पुरुषों के शरीर में बल और वीर्य की बढ़ोत्तरी होती है और वह संभोगक्रिया को लंबे समय तक चला सकता है। इस औषधि के सेवन काल के दौरान खटाई, तेज मिर्च-मसाले वाले और तले हुए भोजन का सेवन करना चाहिए।
  7. * मुलहठी के बारीक चूर्ण को 10 ग्राम की मात्रा में घी और शहद से साथ चाटकर ऊपर से दूध पीने से संभोग शक्ति बहुत तेज होती है।
  8. * सर्दी के मौसम में उड़द की दाल के लड्ड़ू बनाकर रोजाना सुबह के समय खाकर ऊपर से दूध पीने से शरीर में बल और वीर्य की वृद्धि होती है।
  9. * लगभग 20 ग्राम उड़द की दाल के छिलके उतारकर रात के समय पानी में भिगों दें। सुबह इस दाल को बारीक पीसकर पिट्ठी बना लें और कड़ाही में डालकर घी के साथ गुलाबी होने तक सेक लें। इसके बाद एक दूसरे बर्तन में 250 ग्राम दूध डालकर उबाल लें। दूध के उबलने पर इसमें सिंकी हुई उड़द की दाल डालकर पका लें। पकने पर इसमें शक्कर डालकर नीचे उतार लें। इस खीर को ठंडा करके रोजाना सुबह नाश्ते के समय 2 चम्मच शहद के साथ सेवन करने से पुरुष की संभोग शक्ति बहुत ज्यादा तेज हो जाती है।
  10. * लगभग 250 ग्राम शतावरी घृत में इतनी ही मात्रा में शक्कर, 5 ग्राम छोटी पीपल और 5 चम्मच शहद मिला लें। इस मिश्रण को 1-1 चम्मच की मात्रा में सुबह और शाम दूध के साथ सेवन करने से संभोग करने की शक्ति तेज हो जाती है।
  11. * कौंच के बीज, उड़द, गेंहू, चावल, शक्कर, तालमखाना और विदारीकंद को बराबर मात्रा में लेकर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में दूध मिलाकर आटे की तरह गूंथ लें। इसके बाद इसकी छोटी-छोटी पूड़ियां बनाकर गाय के घी में तल लें। इन पूड़ियों को खाकर ऊपर से दूध पीने से वीर्य की बढ़ोतरी होती है और संभोग करने की शक्ति तेज होती है। दिए गए द्रव्यों के देशी घी में लड़डू बनाकर सेवन करना भी बहुत लाभकारी रहता है।
  12. * जानकारी- उड़द की दाल और कौंच के बीजों को प्रयोग में लाने से पहले उन्हें गर्म पानी या दूध में उबालकर उनके छिलके उतार लेने चाहिए।
  13. * दही की मलाई में उतनी ही मात्रा में वंशलोचन, कालीमिर्च, शक्कर, शहद और काली मिर्च मिला लें। इसके बाद एक मिट्टी के घड़े के मुंह पर साफ कपड़ा बांध देना चाहिए तथा उस कपड़े से दिए गए मिश्रण को छान लें। इससे मिश्रण छनकर उस घड़े के अंदर जमा हो जाएगा। इस छने हुए मिश्रण को रोजाना 2-2 चम्मच की मात्रा में घी के साथ सेवन करके ऊपर से दूध पीने से पुरुष के शरीर में ताकत आती है और संभोग शक्ति तेज होती है।
  14. * 30 पीस छोटी पीपल को लगभग 40 ग्राम तिल के तेल या गाय के घी में भूनकर बिल्कुल पाउडर बना लें। फिर उसमें शहद और शक्कर मिलाकर दूध निकालने के बर्तन में डालकर उसी के अंदर गाय का दूध दूह लें। इस दूध को अपनी रुचि के अनुसार सेवन करें। इसको 1-1 चम्मच की मात्रा में गाय के ताजा निकले हुए दूध के साथ सेवन करने से बल और वीर्य की वृद्धि होती है।
  15. * 100-100 ग्राम शतावरी, कौंच के बीज, उड़द, खजूर, मुनक्का दाख और सिंघाड़ा को मोटा-मोटा पीसकर चूर्ण बना लें। इसके बाद 1 लीटर दूध में इतनी ही मात्रा में पानी मिलाकर इसमें चूर्ण को भी मिला लें और हल्की आग पर पकाने के लिए रख दें। पकने पर जब सिर्फ दूध बच जाए तो नीचे उतारकर छान लें। फिर इसमें लगभग 300-300 ग्राम चीनी, वंशलोचन का बारीक चूर्ण और घी मिला लें। इसके बाद इसमें शहद मिलाकर 50 ग्राम की मात्रा में रोजाना सुबह और शाम सेवन करने से बल और वीर्य बढ़ता है।
  16. * लगभग 25 ग्राम खस-खस के दाने, 25 ग्राम भुने चने, 25 ग्राम खांड और नारियल की पूरी गिरी को एक साथ कूटकर पीसकर रख लें। इस चूर्ण को रोजाना 70 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से शरीर में वीर्य और ताकत की बढ़ोत्तरी होती है।
  17. * लौंग, अकरकरा, कबाबचीनी, ऊदस्वालिस और बीजबंद को बराबर की मात्रा में लेकर कूटकर और पीसकर छान लें। इसके बाद इस चूर्ण के वजन से 2 गुणा पुराना गुड़ लेकर लेकर इसमें मिला लें और छोटी-छोटी गोलियां बना लें। यह 1-1 गोली रोजाना सुबह और शाम दूध के साथ 21 दिनों तक लेने से शरीर में बल और वीर्य की वृद्धि होती है और संभोग करने की शक्ति तेज होती है।
  18. * 25 ग्राम पिसी-छनी हुई मुलहठी, 25 ग्राम पिसी और छनी असगंध, और 12 ग्राम पिसा और छना हुआ बिधारा को एकसाथ मिलाकर शीशी में भर लें। सर्दी के मौसम में इसमें से 3 ग्राम चूर्ण को अच्छी तरह से घुटे हुए लगभग 0.12 ग्राम मकरध्वज के साथ मिला लें। इसके बाद इसे मिश्री मिले दूध के साथ रोजाना सुबह और शाम 3-4 महीनों तक सेवन करने से संभोग शक्ति तेज होती है।
  19. * लगभग 25-25 ग्राम सफेद बूरा, ढाक की छाल का रस, गेंहू का मैदा और शुद्ध घी को एकसाथ मिलाकर हलवा बना लें। इस हलुए को रोजाना सुबह और शाम सेवन करने से शरीर मजबूत बनता है, धातु पुष्ट होती है और संभोग करते समय चरम सुख की प्राप्ति होती है।
  20. * 10 ग्राम भैंस का घी और 10 ग्राम सितोपलादि चूर्ण को किसी कांच या मिट्टी के बर्तन में भरकर रख लें। फिर उसी बर्तन में गाय या भैंस का दूह लें तथा उस दूध को पी लें। रोजाना सुबह और शाम 3-4 महीनों तक इस दूध का सेवन करने से हर प्रकार की कमजोरी दूर हो जाती है, धातु पुष्ट हो जाता है, बल-वीर्य की बढ़ोतरी होती है, स्तंभन शक्ति बढ़ती है और संभोग शक्ति में रुचि उत्पन्न होती है।
  21. * सफेद चीनी, ग्वारपाठे का गूदा, घी और गेंहू के मैदा को बराबर मात्रा में एकसाथ मिलाकर हलवा बनाकर खाने से 21 दिन में ही पुरुष की नपुंसकता दूर हो जाती है।
  22. * 25-25 ग्राम केसर, पीपल, जायफल, जावित्री, अकरकरा, सोंठ, लोंग और लाल चंदन, 6 ग्राम शुद्ध हिंगुल, 6 ग्राम शुद्ध गंधक और 90 ग्राम अफीम को ले लें। इन सारी औषधियों को कूटकर और छानकर लगभग 20-20 ग्राम की मात्रा में रख लें। फिर सबको एकसाथ मिलाकर हिंगुल, गंधक और अफीम के साथ खरल में डालकर पानी मिलाकर घोट लें। इसके पूरी तरह से घुट जाने पर 0.36 ग्राम और 0.36 ग्राम की गोलियां बना लें। यह एक गोली रोजाना सोने से पहले खाकर ऊपर से दूध पीने से संभोग करने की शक्ति तेज होती है और स्तंभन शक्ति बढ़ती है।
  23. * सूखे बिदारीकंद को पीसकर उसमें ताजी बिदारीकंद के रस की 7 भावनाएं देकर उसमें मिश्री तथा शहद मिलाकर लगभग 20 ग्राम की मात्रा में नियमित रूप से 3 महीने तक सुबह के समय सेवन करने से बूढ़े लोग भी अपने शरीर में जवानों जैसी ताकत महसूस करते हैं।
  24. * कुलंजन, सोंठ, मिश्री, अंजीर के बीज, गाजर के बीज, जरजीह के बीज और टिलयुन के बीजों को बराबर मात्रा में मिलाकर कूटकर और पीसकर छान लें। इसके बाद शहद और सफेद प्याज के पत्तों के रस को एक साथ मिलाकर किसी कलईदार बर्तन में भरकर हल्की आग पर पकाने के लिए रख दें। जब प्याज का रस जल जाए और सिर्फ शहद ही बाकी रह जाए तो इसमें पहले बताई गई औषधियों का तैयार किया हुआ चूर्ण मिला लें। इस मिश्रण को अपनी ताकत के अनुसार सेवन करने से संभोग करने की शक्ति और संभोग करने में रुचि बढ़ती है।
  25. * लगभग 10-10 ग्राम जायफल, काला अनार, रुमी मस्तंगी, खस की जड़, बालछड़, दालचीनी, बबूल और शहद, 1 ग्राम कस्तूरी, 9 ग्राम सालममिश्री और 125 ग्राम मिश्री को एक साथ मिलाकर पीसकर छान लें। इस चूर्ण को 6 ग्राम की मात्रा में रोजाना सुबह और शाम 3-4 महीने तक सेवन करने से संभोग करने की शक्ति तेज हो जाती है।
  26. * सूखे आंवलों को अच्छी तरह से कूटकर और पीसकर छान लें। इस चूर्ण में ताजे आंवलों के ताजा रस को उबालकर और सुखाकर किसी कांच की शीशी में भर लें। इस मिश्रण में शहद और मिश्री मिलाकर अपनी ताकत के अनुसार 3 महीने तक खाने से बूढ़े लोगों के शरीर में भी जवानों के जैसी संभोग करने की ताकत आ जाती है।
  27. * तालमखाना, समुंद्रशोष, ढाक का गोंद, बीजबंद, बड़े गोखरू, तज और सफेद मूसली को एक साथ मिलाकर कूटकर और पीसकर छान लें। इसके बाद इस चूर्ण के बराबर ही इसमें पिसी हुई मिश्री मिलाकर रख लें। इस चूर्ण को रोजाना सुबह 6 ग्राम की मात्रा में फांककर उसके ऊपर से गाय का धार वाला ताजा दूध पीने से शरीर में ताकत और वीर्य की बढ़ोतरी होती है।
लाभकारी शास्त्रीय वाजीकर योग :

पुष्पधंवा रस-इस योग का सेवन स्त्री और पुरुष दोनों ही के लिए लाभकारी रहता है और यह बहुत ही प्रसिद्ध योग है। इसकी 1-1 गोली सुबह और शाम पीसकर इसमें 1.5 चम्मच मक्खन और मिश्री मिलाकर प्रयोग करने से स्त्री और पुरुष दोनों ही की संभोग करने की शक्ति और रुचि में वृद्धि होती है। इसके ऊपर से दूध में पिंड खजूर को उबालकर खाएं और दूध को पी लें। इसका सेवन करने से लगभग 10 दिनों के अंदर ही शरीर में काम-उत्तेजना जागृत होने लगती है।

किसी स्त्री या पुरुष को किसी दुर्घटना या दिमागी चोट के कारण संभोग करने की इच्छा न करती हो तो इसका सेवन करने से उनकी संभोग करने में रुचि जागृत होने लगती है। इसके सेवन से लिंग की नसों में रक्त का संचार होने लगता है जिससे लिंग ज्यादा उत्तेजित होता है और संभोग शक्ति में चरम सुख प्राप्त होता है। जिन दंपतियों के घर में कोई संतान पैदा नहीं होती वह भी इसका सेवन करने से संतान प्राप्ति कर सकते हैं।

वानरी गुटिका- लगभग 150 ग्राम कौंच के बीजों को 2 लीटर दूध में डालकर उबाल लें। उबलने पर जब दूध गाढ़ा हो जाए तो इसे नीचे उतारकर ठंडा कर लें और बीजों के छिलके उतार लें। इसके बाद इन बीजों को बिल्कुल बारीक पीसकर रख लें। अब बीजों की पिट्ठी बनाकर इतनी ही मात्रा में मैदा मिलाकर एकसाथ गूंथ लें। फिर इसमें थोडा सा गिल्ट और मिल्कमेड का गुलाब जामुन पाउडर मिलाकर छोटे-छोटे आकार के गोले बनाकर गाय के घी में हल्का गुलाबी होने तक तलें। इन्हे एकतार की चाशनी में डालते जाएं। ठंडा होने के बाद इस चाशनी में ही शहद डालकर किसी कांच के बर्तन में सुरक्षित रख लें। इस 1-1 गुलाब जामुन को सुबह और शाम सेवन करने से पुरुष के शरीर में संभोग करने की शक्ति बहुत तेज हो जाती है।

संभोगशक्ति वढ़ाने वाले पकवान :

  1. सिंघाड़े का हलवा-सबसे पहले लगभग 25 ग्राम सिंघाड़े का आटा, 25 ग्राम घी, 50 ग्राम चीनी और 250 ग्राम दूध ले लें। इसके बाद सिंघाड़े के आटे में घी डालकर हल्की आग पर लाल होने तक पकने के लिए रख दें। जब यह आटा अच्छी तरह से सिक जाए तो इसमें दूध डालकर पकाएं और हलुए की तरह सेक लें। जब यह गाढ़ा हो जाए तो इसमें चीनी डालकर चलाएं और तैयार होने के बाद नीचे उतार लें। इस हलुए को रोजाना सुबह नाश्ते में खाने और ऊपर से दूध पीने से वीर्य की बढ़ोतरी होती है और संभोग करने की शक्ति तेज होती है।
  2. छुआरे का हलुवा-छुआरे का हलुवा बनाने के लिए 50 ग्राम छुआरे. 50 ग्राम घी, 300 ग्राम दूध, 50 ग्राम पिसी हुई मिश्री और 2 इलायची के पीस ले लें। इसके बाद छुआरों के बीजों को निकाल लें और बीज निकले हुए छुआरों को 250 ग्राम दूध में उबाल लें तथा बारीक पीस लें। इसके बाद कड़ाही में घी डालकर पिसे हुए छुआरों को इसमें डालकर भून लें। जब यह लाल हो जाए तो इसमें दूध डालकर पकाएं और गाढ़ा हो जाने पर इसमें पिसी हुई मिश्री मिला लें। अब इसमें इलायची के दानों का पाउडर मिलाकर अच्छी तरह से मिला लें। अब हलुआ तैयार है। इस हलुए को पाचन शक्ति के अनुसार 30 से 60 ग्राम की मात्रा में रोजाना सुबह-सुबह खाकर ऊपर से दूध पीने से शरीर में बल और वीर्य की मात्रा बढ़ती है, संभोग शक्ति तेज होती है और शरीर मजबूत बनता है।
  3. उड़द की खीर-उड़द की दाल को घी में भूनकर उसमें दूध डालकर पकाएं। जब खीर तैयार हो जाए तो उसमें चीनी मिलाकर नीचे उतार लें। इस खीर को रोजाना सुबह नाश्ते के रूप में सेवन करने से वीर्य की बढ़ोत्तरी और संभोग करने की शक्ति तेज होती है।
  4. सफेद मूसली की खीर-सफेद मूसली की खीर तैयार करने के लिए सबसे पहले 10 ग्राम सफेद मूसली का चूर्ण, 250 ग्राम गाय का दूध और 20 ग्राम पिसी हुई मिश्री लें लें। इसके बाद मूसली के चूर्ण को दूध में मिलाकर उबाल लें। उबलने पर जब यह गाढ़ा हो जाए तो इसमें पिसी हुई मिश्री मिलाकर नीचे उतार लें। इस मिश्रण को ठंडा करके नियमित रूप से सेवन करने से वीर्य की बढ़ोत्तरी होती है, धातु की कमजोरी समाप्त होती है, नपुंसकता रोग में लाभ मिलता है और शीघ्रपतन रोग दूर होता है।
  5. नारियल के लड्डू-नारियल के लड्डू बनाने के लिए सबसे पहले 250 ग्राम कच्चे नारियल की कद्दूकस करी हुई गिरी, 50 ग्राम घी, 125 ग्राम मावा, 250 ग्राम चीनी और 10 छोटी इलायची को पीस लें। इसके बाद लगभग 25 ग्राम घी को कड़ाही में डालकर उसके अंदर नारियल की गिरी को मिलाकर भून लें। अब बचे हुए घी को मावे के साथ मिलाकर भून लें। इसके बाद दोनों भुनी हुई चीजों को आपस में मिला लें। अब इसके अंदर चीनी की चाशनी बनाकर मिला लें और इलायची का बारीक पिसा हुआ चूर्ण भी डाल लें। इस मिश्रण के 20-20 ग्राम के लड्ड़ू बनाकर 1-1 लड्ड़ू रोजाना सुबह और शाम दूध के साथ सेवन करने से धातु की कमी, कमजोरी, वीर्य की कमी होना आदि रोग दूर हो जाते हैं।
वाजीकरण औषधि का सेवन करते समय परहेज करने योग्य बातें :

जिस तरह से आर्युवेद की किसी भी औषधि का सेवन करते समय क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए इस बात का खासतौर पर ध्यान रखा जाता है उसी तरह से वाजीकरण औषधि का प्रयोग करते समय भी व्यक्ति को कई तरह के परहेजों से गुजरना पड़ता है। इसके सेवन काल के दौरान व्यक्ति को जल्दी पचने वाला और पौष्टिक भोजन करना चाहिए। क्योंकि इस औषधि का सेवन करने के दौरान कब्ज का रोग बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए। भोजन में हरी सब्जियां. मौसमी फल, खिचड़ी, मोटे आटे की रोटी, दूध, सलाद, दलिया आदि का सेवन ज्यादा मात्रा में करना चाहिए। व्यक्ति को खटाई, खट्टे फल, तंबाकू, गुटखा, पान, शराब आदि का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए।
स्रोत: jyotishsansar.org

यह सामग्री निम्न स्त्रोत से पेस्ट की गयी है : विजय वाणी 

Sunday, 10 November 2013

सेक्स में बरतें समझदारी

सेक्स में बरतें समझदारी

सेक्स को लेकर लोगों के मन में कई तरह के कंफ्यूजन रहते हैं। कई बार यही कंफ्यूज़न सेक्स का सही आनंद लेने की राह में बाधा भी बन जाते हैं। दूर कीजिए ऐसे ही कुछ बड़े कंफ्यूज़न को ताकि आप समझदारी से सेक्स कर सकें। (और सेक्स का भरपूर आनंद ले सकें)

साइज डज मैटर


आप अपने मन से यह भ्रम निकाल दें कि आकार से कोई फर्क पड़ता है। साइज से कुछ नहीं होता है। सबसे जरूरी चीज है अपने पार्टनर के जज्बातों का खयाल रखना। इससे सेक्स की अवधि बढ़ती है। साथ ही आप इसका खूब आनंद भी लेते हैं।

मर्दों के दिमाग में हमेशा सेक्स

कहा जाता है कि मर्द हर 7वें सेकेंड में सेक्स के बारे सोचते हैं, लेकिन ऐसा नही है। रिसर्च से पता चला है कि सिर्फ 15 फीसदी मर्द ही दिन भर में कई बार सेक्स के बारे में सोचते हैं। करीब आधे मर्द महीने में केवल कुछ दिन और 4 फीसदी महीने में एक बार भी सेक्स के बारे में नहीं सोचते। सेक्स के बारे में सोचने में महिलाएं ही आगे हैं। 19 प्रतिशत महिलाएं रोज कई बार सेक्स के बारे में सोचती है और 67 फीसदी महिलाएं हफ्ते में और सिर्फ 14 फीसदी महीने में सेक्स के बारे में सोचती हैं।

ओरल सेक्स से खतरा नहीं

ओरल सेक्स से भी सेक्सुअली ट्रांसमिटेड बीमारियों के फैलने का खतरा रहता है। अगर मुंह या गले में कहीं कुछ कटा होता है या कोई खुला घाव होता है, तो वहां से इन बीमारियों के फैलने का खतरा होता है।

पुरुष हमेशा रहते हैं तैयार

ऐसा भ्रम है कि पुरुष सेक्स के लिए हमेशा तैयार रहता है, लेकिन ऐसा नहीं है। पुरुष भी थकता है। तनाव के चलते या मूड नहीं रहने के चलते वह सेक्स में रुचि नहीं दिखा सकता है। इसलिए अगर पुरुष सेक्स के लिए तैयार नहीं होता है, इसका मतलब यह नहीं है कि वह आप में रुचि नहीं लेता है।

पुल-आउट कर लेना है सेफ

नहीं, यह बिल्कुल सेफ नहीं है। दरअसल सेक्स के दौरान स्पर्म थोड़ा-थोड़ा कई बार में निकलता रहता है। कई बार तो इसका पता भी नहीं चलता है। स्पर्म की यह मात्रा आपके साथी को प्रेगनेंट करने के लिए काफी है। इसलिए यह जरूरी है कि आप पूरी तरह से सुरक्षित सेक्स करें।

स्त्रोत : नवभारतटाइम्स डॉट कॉम | Nov 10, 2013,

Sunday, 20 October 2013

वीर्य महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए अमृत

न्‍यूयॉर्क। सेक्‍स महिलाओं को न केवल रिचार्ज करता है, बल्कि तनाव और अवसाद अर्थात डिप्रेशन (depression) से उबरने में भी उनकी मदद करता है। एक नए शोध में पता चला है कि पुरुषों के वीर्य में मौजूद रसायन महिलाओं के शरीर में रसायनिक बदलाव ले आता है, जिससे उनका मूड खुशगवार हो जाता है।

मेल ऑनलाइन में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक सिमेन अर्थात पुरुष वीर्य महिलाओं के सेहत के लिए दवा का काम करता है और उन्‍हें डिप्रेशन से उबारने में मदद करता है। शोध में कहा गया है कि वीर्य में कई ऐसे रासायन पाए जाते हैं तो जो न केवल मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए दवा का काम करते हैं, बल्कि आपसी प्रेम को बढ़ाने में भी सहायक हैं। शोध यह भी कहता है कि असुरक्षित यौन संबंध के दौरान योनि के जरिए हो या मुख मैथुन के जरिए, वीर्य महिलाओं के अंदर पहुंच कर उनके मूड में जबरदस्‍त बदलाव लाने में सहायक है।

आखिर ऐसा क्‍या है पुरुषों के वीर्य (Semen) में 
शोधकर्ताओं के अनुसार, वीर्य में ऐसा रसायन होता है तो महिलाओं में अनुराग और प्रेम के स्‍तर को बढ़ा देता है। उनके मानसिक दशा में तत्‍काल सकारात्‍क बदलाव देखने को मिलता है। सेक्‍स के बाद महिलाएं गहरे नींद की आगोश में जाना चाहती हैं, जो उनके तनाव को कम करने में सहायक है। वीर्य में ऐसे रसायन हैं जो अवसादक यानी एंटी डिप्रेशन दवा का काम करते हैं।

शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन महिलाओं के पुरुष साथी हमेशा कंडोम लगाकर सेक्‍स करते थे, उनमें तनाव का स्‍तर ज्‍यादा था, बनिस्‍पत उन महिलाओं के जिनके पुरुष साथी हमेशा असुरक्षित संभोग ही करते थे। बिना कंडोम के संभोग पसंद करने वाली महिलाओं ने संज्ञानात्‍मक टेस्‍ट अर्थात भावनात्‍मक परीक्षा में बेहतरीन स्‍कोर किया। यानी ऐसी महिलाएं भावना या संवेदना के अधिक नजदीक पाई गईं।

शोधकर्ताओं के अनुसार, वीर्य में शुक्राणु के साथ-साथ कॉर्टिसोल भी पाया जाता है। कॉर्टिसोल लगाव बढ़ाने और तनाव घटाने वाला एक हार्मोन है। इसके अलावा इसमें पाया जाने वाला एस्‍ट्रोन मूड बनाने और ऑक्‍सीटॉक्सिन को बढ़ाने में सहायक है। यही नहीं, तनाव कम करने वाला थायरोट्रोपिन और नींद बढ़ाने वाला मेलाटोनिन हार्मोन भी वीर्य में मौजूद होता है, जो तनाव घटाने वाला हार्मोन है।

यही नहीं, इसमें सेरोटोनिन हार्मोन की भी अच्‍छी मात्रा होती है। सेरोटोनिन को अवसाद कम करने वाला न्‍यूरोट्रांसमीटर तक कहा जाता है। स्‍त्री के अंदर वीर्य का स्राव होते ही ये सारे हार्मोन काम करने लगते हैं, जो उनके मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ाने वाला साबित होता है।


सर्वे का तरीका
द स्‍टेट यूनिवर्सिटी ऑफ न्‍यूयॉर्क के वैज्ञानिकों ने विश्‍वविद्यालय परिसर में रहने वाली 293 महिलाओं पर यह शोध किया। सर्वे में शामिल महिलाओं के सेक्‍स के प्रयोगात्‍मक अनुभव और उनकी यौन जिंदगी के आधार पर प्रश्‍न पूछे गए, जिसके आधार पर यह निष्‍कर्ष निकाला गया कि मुख मैथुन और संभोग के समय जिन महिलाओं में पुरुषों का वीर्य पहुंचा उनका मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य बहुत बेहतर था। वहीं कंडोम लगाकर सेक्‍स करने वाली महिलाओं में तनाव का स्‍तर ज्‍यादा देखा गया।

निष्‍कर्ष 
* शोधकर्ता गॉलअप एंड ब्रुच एवं मनोवैज्ञानिक स्‍टीवन प्‍लेटक की प्रकल्‍पना है कि जो महिलाएं असुरक्षित संभोग करती हैं वो तनाव की कम शिकार होती हैं।

* गोलुप की प्रयोगशाला ने यह भी निष्‍कर्ष निकाला कि वीर्य ग्रहण करने वाली महिलाएं जीवन के हर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करती हैं, क्‍योंकि उनकी एकाग्रता का स्‍तर बहुत अधिक होता है। कोई भी टास्‍क उनके संज्ञान में तेजी से आती हैं, जिसे अपनी एकाग्रता के बल पर वह उनका हल कर पाती हैं।

* शोधकर्ताओं ने तीसरा नतीजा यह निकाला कि मत भिन्‍नता वाले चिर स्‍थाई साथी की अपेक्षा अजनबियों से स्‍थापित सेक्‍स संबंध में स्रावित वीर्य महिलाओं के शरीर में अधिक सकारात्‍मक प्रभाव पैदा कर सकता है।


* शोधकर्ताओं की चौथी प्रकल्‍पना यह है कि अजनबी पुरुष से सेक्‍स करने पर महिलाओं में गर्भ ठहरने की आशंका कम रहती है। अजनबियों से सेक्‍स करने के दौरान महिलाएं जानती और सोचती हैं कि उन्‍हें उससे बच्‍चे नहीं चाहिए। यही कारण है कि सेक्‍स के दौरान उनका रक्‍तचाप बहुत बढ़ जाता है। यही नहीं, उनके पेशाब में प्रोटीन की मात्रा भी बढ़ जाती है, जो शुक्राणुओं को नष्‍ट कर देता है।

* शोधकर्ताओं का कहना है कि अपने स्‍थाई पार्टनर के साथ असुरक्षित संभोग करने और बार-बार उससे गर्भधारण करने वाली महिलाओं को जब उनसे अलगाव का सामना करना पड़ता है तो वो अक्‍सर अवसाद की शिकार हो जाती हैं। लेकिन वहीं जो महिलाएं अपने साथी के साथ नियमित रूप से असुरक्षित संभोग नहीं करतीं, वो नए संबंध बनाने के लिए तुरंत तैयार हो जाती हैं और ऐसा वो अनजाने में प्रतिशोध या बदला लेने के लिए करती हैं।

* शोधकर्ताओं का कहना है कि सेक्‍स खुशी तो देता ही है, लेकिन जब एक स्‍त्री की योनि में वीर्य का स्राव तेजी से होता है तो वह आनंद से भर उठती है। कंडोम सेक्‍स में स्‍त्री को उस चरम आनंद की प्राप्ति नहीं हो पाती है। संभोग में चरम आनंद की दशा गहरे से गहरे तनाव को छूमंतर कर देती है।

स्त्रोत : आधी आबादी, "वीर्य महिलाओं को उबारता है डिप्रेशन से" Friday, 24 August 2012 16:59

s

s
s

d

d
d