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"हर एक स्त्री और पुरुष को प्यार करने और प्यार पाने का जन्मजात और प्राकृतिक अधिकार है। इसलिए हर एक व्यक्ति को प्रेम सम्बन्ध में होना चाहिए।"-"Every Woman and Man Have Inherent and Natural Right to Love and being Loved. Therefore Every Person Should be in Loving Relationship."
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Wednesday, 19 February 2014

सम्भोग के दौरान दर्द?-Pain During Intercourse?

गीतांजलि चंद्रशेखरन

सेक्स से बढ़िया चॉकलेट होता है। ऐसा कई महिलाओं का कहना है जो हर दिन पेनफुल इंटरकोर्स से जूझती हैं। रितिका सोहनी बेहिचक इस तथ्य को स्वीकार करती हैं। उन्होंने कहा कि उस एपिसोड को बिते 5 साल हो गए हैं। तब मुझे अपनी देह में वजाइना की स्थिति के बारे में कोई आइडिया नहीं था। आज की तारीख में सोहनी 33 साल की हैं। उनकी हाल ही में शादी हुई है। सोहनी ने शादी के 6 महीने बाद गाइनकॉलजिस्ट(स्त्री रोग विशेषज्ञ) से मिलने का फैसला किया। वह इंटरकोर्स के दौरान होने वाले दर्द से परेशान थीं। सेक्स के दौरान वजाइना में हाइमन के टूटने से होने वाली ब्लीडिंग चिंता का सबब नहीं था ब्लकि सोहनी इंटरकोर्स के दौरान जिस दर्द को झेल रही थीं उससे वह बेहद परेशान थीं। जब भी सोहनी को इंटिमेट होने का मौका मिलता है, वह डर जातीं। सोहनी नहीं चाहती कि उनका पति इंटरकोर्स करे।
सोहनी ने बताया कि उन्होंने एक दूसरे गाइनकॉलजिस्ट से मिलने का फैसला किया। लेकिन उस डॉक्टर ने सेक्स के दौरान सहयोग न मिलने पर थप्पड़ मारने की सलाह दी। सोहनी ने बताया कि सौभाग्य से मेरे पति ने उस सलाह पर विचार तक नहीं किया। अब सोहनी के पास इस मामले में ऑनलाइन रिसर्च का विकल्प बचा था। रिसर्च के दौरान सोहनी को पता चला कि वह योनी संकुचन की समस्या से पीड़ित हैं। इस समस्या से घिरे होने पर न चाहते हुए भी वजाइना सिकुड़ने की स्थिति में आ जाता है। ऐसी स्थिति में इंटरकोर्स के दौरान अथाह दर्द, जलन और टीस से कोई भी परेशान हो सकती है। ऐसे में पुरुष के लिए भी इंटरकोर्स असंभव है।

केईएम हॉस्पिटल के सेक्शुअल मेडिसीन डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. राजन बंसल ने कहा कि ऐसी हालात में महिलाएं कुछ कहने की स्थिति में नहीं होती हैं कि वह बिस्तर पर नाकाम क्यों रह जाती हैं। डॉ. बंसल ने कहा कि ज्यादातर मामलों में इंटरकोर्स के दौरान यह दर्द मनोवैज्ञानिक होता है। तब संभव है कि उसे किसी बच्चे की तरह अब्यूज किया जाता हो। या फिर कोई उसकी दोस्त कहे कि सेक्स पेनफुल होता ही है। कई ऐसी वजहें हो सकती हैं जब इंटरकोर्स किसी ट्रॉमा से कम नहीं होता। ऐसी स्थिति में काउंसलिंग का सहारा लिया जा सकता है। दोनों को इस समस्या से डरने की बजाय पूरे विश्वास के साथ समझने की जरूरत है। इसमें पुरुष साथी को चाहिए कि वह इंटरकोर्स इत्मीनान और आहिस्ते-आहिस्ते करे। इस दौरान ज्यादा प्रेशर से बचना चाहिए। झटके से भी बचें। ऐसी स्थिति में महिलाएं इस आइडिया को आजमा सकती हैं। वे इंटरकोर्स से पहले अपने वजाइना की में अपनी उंगली डालकर थोड़ा फैलाने की कोशिश करें। इससे उन्हें इंटरकोर्स की प्रक्रिया को समझने में मदद मिलेगी। मिरर सेक्स कॉलमिस्ट डॉ. महिंदर वत्स का कहना है कि ऐसे मामलों में कई बार जारूकता की भी कमी देखी जाती है। कपल्स को यह बात पता होती है कि वजाइना पर्याप्त रूप में फैलने में समर्थ होता है। नॉर्मल डिलिवरी में इस बात को हम बखूबी समझते भी हैं। ऐसे में सेक्स के दौरान इंटरकोर्स कोई समस्या नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि इस तरह के ज्यादातर मामलों में फोर प्ले की कमी होती है। मर्दों के मुकाबले महिलाएं सेक्स के दौरान उत्तेजित होने में ज्यादा वक्त लेती हैं। यदि वजाइना ड्राइ है तो इंटरकोर्स पेनफुल होगा। स्त्रोत : हमाचल गौरव उत्तराखंड, शीर्षक-"महिलाएं बिस्तर पर नाकाम क्यों

Monday, 2 December 2013

स्‍त्री, संभोग और चरम तृप्ति

स्‍त्री, संभोग और चरम तृप्ति

यौन उत्‍तेजना का पहला अनुभव मस्तिष्‍क में होता है। इसके बाद सभी तंत्रिकाओं (नर्व्‍स) में खून तेजी से दौड़ने लगता है। इस कारण संभोगरत स्‍त्री का चेहरा तमतमा उठता है। कान, नाक, आंख, स्‍तन, भगोष्‍ठ व योनि की आंतरिक दीवारें फूल जाती हैं। भगांकुर का मुंड भीतर की ओर धंस जाता है, ह़दय की धड़कने बढ़ जाती हैं। योनि द्वार के अगलबगल स्थित बारथोलिन ग्रंथियों से तरल पदार्थ निकल कर योनि पथ को चिकना बना देता है, जिससे पुरुष लिंग और गहरे प्रवेश कर जाती है। डाक्‍टर किंसे के अनुसार, जब तक पुरुष का लिंग स्‍त्री योनि की गहराई तक प्रवेश नहीं करता, तब तक स्‍त्री को पूर्ण आनंद नहीं मिलता है।

उत्‍तेजना के कारण स्‍त्री के गर्भाशय ग्रीवा से कफ जैसा दूधिया गाढ़ा स्राव निकल आता है। गर्भाशय ग्रीवा के स्राव के कारण गर्भाशय मुख चिकना हो जाता है, जिससे पुरुष वीर्य और उसमें मौजूद शुक्राणु आसानी से तैरते हुए उसमें चले जाते हैं।

काम में संतुष्टि का अनुभव
यौन उत्‍तेजना के समय स्‍त्री की योनि के भीतर व गुदाद्वार के पास की पेशियां सिकुड़ जाती हैं। ये रुक-रुक कर फैलती और सिकुड़ती रहती है। यह इस बात का प्रमाण है कि स्‍त्री संभोग में पूरी तरह से संतुष्‍ट हो गई हैं। पुरुष अपने लिंग के ऊपर पेशियों के फैलने सिकुड़ने का अनुभव कर सकता है।

स्‍त्री आर्गेज्‍म की कई अवस्‍था
  1. * संभोग काल में हर स्‍त्री की चरम तृप्ति एक समान नहीं होती है। हर स्‍त्री के आर्गेज्‍म अनुभव अलग होता है। डॉ विलि, वैंडर व फिशर के अनुसार, चरमतृप्ति या आर्गेज्‍म प्राप्ति काल में स्‍त्री की योनि द्वार, भगांकुर, गुदापेशी व गर्भाशय मुख के पास की पेशियां तालबद्ध रूप में फैलने व सिकुड़ने लगती है। कभी-कभी ये पांचों एक साथ गतिशील हो जाती है, उस समय स्‍त्री के आनंद की कोई सीमा नहीं रह जाती है।
  2. * कोई स्‍त्री अनुभव करती है कि उसका गर्भाशय एक बार खुलता फिर बंद हो जाता है। इसमें कई स्त्रियों के मुंह से सिसकारी निकलने लगती है।
  3. * कुछ स्त्रियों में संपूर्ण योनि प्रदेश, गुदा से लेकर नाभि तक में सुरसुराहट की तरंग उठने लगती है। कई बार यह तरंग जांघों तक चली जाती है। उस समय स्‍त्री के चरम आनंद का ठिकाना नहीं रहता।
  4. * कुछ स्त्रियों को लगता है कि उनकी योनि के भीतर गुब्‍बारे फूट रहे हैं या फिर आतिशबाजी हो रही है। यह योनि के अंदर तीव्र हलचल का संकेत है, जो स्‍त्री को सुख से भर देता है।
आर्गेज्‍म काल में स्‍त्री की दशा
डॉ विलि, वैंडर व फिशर के अनुसार, जिस वक्‍त संभोग में स्‍त्री को आर्गेज्‍म की प्राप्ति होती रहती है उस वक्‍त उसकी आंखें मूंद जाती है, स्‍तन के कुचाग्र फड़कने लगते हैं, कानों के अंदर झनझनाहट उठने लगती है, शरीर में हल्‍कापन महसूस होता है, मन सुख की लहर दौड़ पड़ती है, प्रियतम के प्रति प्रेम से मन भर उठता है और कई बार हल्‍की भूख का भी अहसास होता है। कई स्त्रियों को पेशाब लग जाता है।

पुरुष में वीर्यपात तो स्‍त्री में क्‍या?
पुरुष के आर्गेज्‍म काल में उसके लिंग से वीर्य का स्राव होता है, जिसमें उसे आनंद की प्राप्ति होती है। लेकिन आर्गेज्‍म की अवस्‍था में स्‍त्री में ऐसा कोई स्राव होता है या नहीं, कामकला के विद्वानों में इस बात को लेकर मतभेद है। डॉ विलि, वैंडर व फिशर के मतानुसार, अधिक कामोत्‍तेजना के समय स्‍त्री का गर्भाशय सिकुड़ता है, जिससे गर्भाशय का श्‍लैष्मिक स्राव योनि में गिर पड़ता है, बहुत से स्त्रियों के गर्भाशय से कफ जैसा पदार्थ निकलता है और संपूण योनि पथ को गीला कर देता है। इस स्राव में चिपचिपाहट होती है।

Sunday, 20 October 2013

वीर्य महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए अमृत

न्‍यूयॉर्क। सेक्‍स महिलाओं को न केवल रिचार्ज करता है, बल्कि तनाव और अवसाद अर्थात डिप्रेशन (depression) से उबरने में भी उनकी मदद करता है। एक नए शोध में पता चला है कि पुरुषों के वीर्य में मौजूद रसायन महिलाओं के शरीर में रसायनिक बदलाव ले आता है, जिससे उनका मूड खुशगवार हो जाता है।

मेल ऑनलाइन में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक सिमेन अर्थात पुरुष वीर्य महिलाओं के सेहत के लिए दवा का काम करता है और उन्‍हें डिप्रेशन से उबारने में मदद करता है। शोध में कहा गया है कि वीर्य में कई ऐसे रासायन पाए जाते हैं तो जो न केवल मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए दवा का काम करते हैं, बल्कि आपसी प्रेम को बढ़ाने में भी सहायक हैं। शोध यह भी कहता है कि असुरक्षित यौन संबंध के दौरान योनि के जरिए हो या मुख मैथुन के जरिए, वीर्य महिलाओं के अंदर पहुंच कर उनके मूड में जबरदस्‍त बदलाव लाने में सहायक है।

आखिर ऐसा क्‍या है पुरुषों के वीर्य (Semen) में 
शोधकर्ताओं के अनुसार, वीर्य में ऐसा रसायन होता है तो महिलाओं में अनुराग और प्रेम के स्‍तर को बढ़ा देता है। उनके मानसिक दशा में तत्‍काल सकारात्‍क बदलाव देखने को मिलता है। सेक्‍स के बाद महिलाएं गहरे नींद की आगोश में जाना चाहती हैं, जो उनके तनाव को कम करने में सहायक है। वीर्य में ऐसे रसायन हैं जो अवसादक यानी एंटी डिप्रेशन दवा का काम करते हैं।

शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन महिलाओं के पुरुष साथी हमेशा कंडोम लगाकर सेक्‍स करते थे, उनमें तनाव का स्‍तर ज्‍यादा था, बनिस्‍पत उन महिलाओं के जिनके पुरुष साथी हमेशा असुरक्षित संभोग ही करते थे। बिना कंडोम के संभोग पसंद करने वाली महिलाओं ने संज्ञानात्‍मक टेस्‍ट अर्थात भावनात्‍मक परीक्षा में बेहतरीन स्‍कोर किया। यानी ऐसी महिलाएं भावना या संवेदना के अधिक नजदीक पाई गईं।

शोधकर्ताओं के अनुसार, वीर्य में शुक्राणु के साथ-साथ कॉर्टिसोल भी पाया जाता है। कॉर्टिसोल लगाव बढ़ाने और तनाव घटाने वाला एक हार्मोन है। इसके अलावा इसमें पाया जाने वाला एस्‍ट्रोन मूड बनाने और ऑक्‍सीटॉक्सिन को बढ़ाने में सहायक है। यही नहीं, तनाव कम करने वाला थायरोट्रोपिन और नींद बढ़ाने वाला मेलाटोनिन हार्मोन भी वीर्य में मौजूद होता है, जो तनाव घटाने वाला हार्मोन है।

यही नहीं, इसमें सेरोटोनिन हार्मोन की भी अच्‍छी मात्रा होती है। सेरोटोनिन को अवसाद कम करने वाला न्‍यूरोट्रांसमीटर तक कहा जाता है। स्‍त्री के अंदर वीर्य का स्राव होते ही ये सारे हार्मोन काम करने लगते हैं, जो उनके मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ाने वाला साबित होता है।


सर्वे का तरीका
द स्‍टेट यूनिवर्सिटी ऑफ न्‍यूयॉर्क के वैज्ञानिकों ने विश्‍वविद्यालय परिसर में रहने वाली 293 महिलाओं पर यह शोध किया। सर्वे में शामिल महिलाओं के सेक्‍स के प्रयोगात्‍मक अनुभव और उनकी यौन जिंदगी के आधार पर प्रश्‍न पूछे गए, जिसके आधार पर यह निष्‍कर्ष निकाला गया कि मुख मैथुन और संभोग के समय जिन महिलाओं में पुरुषों का वीर्य पहुंचा उनका मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य बहुत बेहतर था। वहीं कंडोम लगाकर सेक्‍स करने वाली महिलाओं में तनाव का स्‍तर ज्‍यादा देखा गया।

निष्‍कर्ष 
* शोधकर्ता गॉलअप एंड ब्रुच एवं मनोवैज्ञानिक स्‍टीवन प्‍लेटक की प्रकल्‍पना है कि जो महिलाएं असुरक्षित संभोग करती हैं वो तनाव की कम शिकार होती हैं।

* गोलुप की प्रयोगशाला ने यह भी निष्‍कर्ष निकाला कि वीर्य ग्रहण करने वाली महिलाएं जीवन के हर क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करती हैं, क्‍योंकि उनकी एकाग्रता का स्‍तर बहुत अधिक होता है। कोई भी टास्‍क उनके संज्ञान में तेजी से आती हैं, जिसे अपनी एकाग्रता के बल पर वह उनका हल कर पाती हैं।

* शोधकर्ताओं ने तीसरा नतीजा यह निकाला कि मत भिन्‍नता वाले चिर स्‍थाई साथी की अपेक्षा अजनबियों से स्‍थापित सेक्‍स संबंध में स्रावित वीर्य महिलाओं के शरीर में अधिक सकारात्‍मक प्रभाव पैदा कर सकता है।


* शोधकर्ताओं की चौथी प्रकल्‍पना यह है कि अजनबी पुरुष से सेक्‍स करने पर महिलाओं में गर्भ ठहरने की आशंका कम रहती है। अजनबियों से सेक्‍स करने के दौरान महिलाएं जानती और सोचती हैं कि उन्‍हें उससे बच्‍चे नहीं चाहिए। यही कारण है कि सेक्‍स के दौरान उनका रक्‍तचाप बहुत बढ़ जाता है। यही नहीं, उनके पेशाब में प्रोटीन की मात्रा भी बढ़ जाती है, जो शुक्राणुओं को नष्‍ट कर देता है।

* शोधकर्ताओं का कहना है कि अपने स्‍थाई पार्टनर के साथ असुरक्षित संभोग करने और बार-बार उससे गर्भधारण करने वाली महिलाओं को जब उनसे अलगाव का सामना करना पड़ता है तो वो अक्‍सर अवसाद की शिकार हो जाती हैं। लेकिन वहीं जो महिलाएं अपने साथी के साथ नियमित रूप से असुरक्षित संभोग नहीं करतीं, वो नए संबंध बनाने के लिए तुरंत तैयार हो जाती हैं और ऐसा वो अनजाने में प्रतिशोध या बदला लेने के लिए करती हैं।

* शोधकर्ताओं का कहना है कि सेक्‍स खुशी तो देता ही है, लेकिन जब एक स्‍त्री की योनि में वीर्य का स्राव तेजी से होता है तो वह आनंद से भर उठती है। कंडोम सेक्‍स में स्‍त्री को उस चरम आनंद की प्राप्ति नहीं हो पाती है। संभोग में चरम आनंद की दशा गहरे से गहरे तनाव को छूमंतर कर देती है।

स्त्रोत : आधी आबादी, "वीर्य महिलाओं को उबारता है डिप्रेशन से" Friday, 24 August 2012 16:59

Wednesday, 16 October 2013

सर्वे ने बताये यौनजीवन से जुड़े 50 बड़े रहस्य

वॉशिंगटन। अमेरिका की राष्‍ट्रीय सर्वे कंपनी ने एक लोगों के यौन संबंधों पर एक बड़ा सर्वेक्षण करवाया, जिसमें कई प्रकार की बातें सामने आयीं। यही नहीं कई तथ्‍या चौंकाने वाले आये, जो लोगों के अंदर यौन क्रियाओं व यौन इच्‍छाओं के प्रति भ्रांतियों को दूर करने वाले हैं। इस सर्वेक्षण पर एक किताब भी प्रकाशित की गई है जिसका नाम व्‍हॉट विमेन वॉन्‍ट्स: एडवेंचर इन साइंस ऑफ फीमेल डिजायर' दिया गया। यह सर्वेक्षण तीन एज ग्रुप्‍स के बीच करवाया गया। पहला 25 से 30 दूसरा 31 से 45 और तीसरा 46 के पार। इस सर्वेक्षण में कई असहज सवाल किये गये, जिनके जवाब लोगों ने खुलकर दिये। इस सर्वेक्षण में लोगों का नाम गोपनीय रखा गया। हफिंगटन पोस्‍ट की खबर के मुताबिक इस सर्वेक्षण में करीब 10 हजार लोगों ने भाग लिया। सर्वेक्षण के साथ-साथ कुछ शोधों की रिपोर्ट भी इसमें शामिल की गई है। इस सर्वेक्षण में सिर्फ यौन संबंधों पर ही नहीं बल्कि प्रेम संबंधों पर भी सवाल किये गये। दाम्‍पत्‍य जीवन, लिव इन रिलेशन शिव में रहने वाले लोगों के जीवन व गर्लफ्रेंड-ब्‍वॉयफ्रेंड के जीवन से जुड़े इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट अमेरिकी सरकार को प्रस्‍तुत की गई है। किताब के लेखक डेनियल बर्गनर ने कहा कि इसमें महिलाओं से जुड़े ऐसे तथ्‍य सामने आये हैं, जिनके बारे में लोग विपरीत ही सोचते हैं। सर्वेक्षण में निकले मुख्‍य बिंदुओं को हम आपके सामने प्रस्‍तुत कर रहे हैं, जिन्‍हें आप स्‍लाइडर में तस्‍वीरों के सामने पढ़ सकते हैं।

यौन इच्‍छाएं महिलाओं में ज्‍यादा : आम तौर पर लोग सोचते हैं कि पुरुषों के अंदर यौन इच्‍छाएं ज्‍यादा होती हैं, बल्कि शोध के अनुसार महिलाएं इसमें आगे होती हैं।

उम्र बढ़ाने के लिए शादी जरूरी : शोध के अनुसार यदि आपको ज्‍यादा समय तक जीवित रहना है, तो शादी जरूर करें। शादी के बाद नियमित रूप से यौन संबंध स्‍थापित करने की वजह से मन शांत रहता है और शारीरिक रूप से ज्‍यादा स्‍वस्‍थ्‍य रहते हैं, जिससे आयु बढ़ती है।

यौन संबंध स्‍थपित करने से पहले : शोध के अनुसार यौन संबंध स्‍थपित करने से पहले उस दौरान व उसके बाद तक अपने दिमाग पर कम से कम जोर डालना चाहिए। इसके लिये यदि आप एक ग्लास वाइन पियें तो बहतर होगा।

आकर्षक दिखने की चाहत : सुंदर और आकर्षक दिखने की चाहत तो कमोबेश हर किसी में होती है, पर इसके लिए स्‍वास्‍थ्‍य से खिलवाड़ कर गुजरता बेहद घातक साबित हो सकता है।

जो कभी शादी नहीं करते : जो स्त्री या पुरुष कभी शादी नहीं करते, उनकी कैंसर से मौत होने की संभावना ज्यादा होती है। इन कैंसरों में फेफड़े, स्तन और प्रोस्टेट जैसे कुल तेरह तरह के सामान्य कैंसर शामिल हैं।

यौन रूप से सक्रिय : यौन रूप से सक्रिय लोगों में से कम से कम 72 प्रतिशत लोगों ने नये साथी के साथ बिना किसी सुरक्षा के यौन संबंध स्‍थापित किये।

मौत के बारे में सोच : मौत के बारे में सोचने वाले पुरुष अपनी मौत से पहले अधिक से अधिक बच्चे पैदा करने की चाहत रखते हैं।

गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन : गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन करने वाली महिलाओं के मूत्र से निकलने वाले ‘ओस्ट्रोजेन' खाद्य श्रृंखला और पेयजल को संदूषित कर सकते हैं। यह हार्मोन कुछ खास तरह के कैंसर का पोषण कर सकता है।

सबसे ज्‍यादा सेवन : दुनिया भर में गर्भनिरोधक गोलियों का सबसे ज्‍यादा सेवन 15 से 25 साल की उम्र के बीच की लड़कियां करती हैं। क्‍योंकि इस उम्र में असुरक्षित यौन संबंध ज्‍यादा होते हैं।

पति-पत्‍नी के बीच प्रेम संबंध : पति-पत्‍नी के बीच प्रेम संबंध बनाये रखने के लिये दोनों के बीच नियमित रूप से यौन संबंध स्‍थापित होना बेहद जरूरी होते हैं। इससे दोनों के बीच अच्‍छी रिलेशनशिप स्‍थापित होती है।

यौन संबंधी समस्‍या : पति-पत्‍नी में से किसी को भी यदि यौन संबंधी समस्‍या होती है, तो पत्‍नी तुरंत पति को बताती है, जबकि पति ऐसी बातों को छिपा जाते हैं। इसके पीछे मर्दानगी का तम्‍गा सबसे बड़ा कारण है।

ज्‍यादा चिंता से ग्रसित : कुंवारे लोग शादी-शुदा लोगों की तुलना में ज्‍यादा चिंता से ग्रसित रहते हैं और जल्‍दी बीमार पड़ते हैं।

नियमित यौन संबंध : नियमित यौन संबंध स्‍थापित करने से हृदय रोग, हाईपर टेंशन, मधुमेह, आदि जैसे रोग जल्‍दी नहीं लगते हैं।

सेक्‍सुअल रिलेशनशिप : आम तौर पर सेक्‍स को लोग गलत निगाह से देखते हैं, जबकि वयस्‍कों के लिये सेक्‍सुअल रिलेशनशिप बेहद जरूरी और स्‍वस्‍थ्‍य माध्‍यम है अपने संबंधों को प्रगाढ़ बनाने का।

महिलाओं की मुश्किल : महिलाएं यौन क्रिया के दौरान बड़ी मुश्किल से अपनी चरम सीमा तक पहुंचती हैं, जबकि पुरुष बहुत जल्‍द।

गर्भनिरोधकों की जरूरत : अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण में शामिल कम से कम 40 फीसद युवाओं ने कहा कि जब उन्हें गर्भनिरोधकों की जरूरत होती है तो उन्हें इन्हें प्राप्त करने में परेशानी होती है।

कंडोम के प्रति भांति : आमतौर पर लोग यौन संबंधों की चरम सीमा तक पहुंचने से पहले कंडोम का प्रयोग नहीं करते हैं, वे तभी कंडोम लगाते हैं, जब ऑरगैज्‍़म तक जाना होता है। उन्‍हें लगता है कि ऐसे लड़की गर्भवती नहीं होगी, जबकि ऐसा नहीं है। आमतौर पर स्‍खलित होने से पहले जो पानी जैसा पदार्थ आता है, उसमें भी कुछ शुक्राणु आ जाते हैं, जिनके अंडाशय तक पहुंचने की संभावना उतनी ही प्रबल होती है, जितनी की बाद के।

लिंग का टेढ़ा पन : आम तौर पर जब किसी का लिंग टेढ़ा हो जाता है, तो उन्‍हें लगता है कि वो किसी विकार से ग्रसित हैं, जबकि विकार की स्थिति तभी उत्‍पन्‍न होती है, जब टेढ़ा होने के साथ-साथ उसमें दर्द या सूजन हो।

लिंग में फ्रैक्‍चर : लोग सोचते हैं कि लिंग में हड्डी नहीं होती, इसलिये फ्रैक्‍चर हो ही नहीं सकता, बल्कि यह धारणा पूरी तरह गलत है। तनाव के वक्‍त अगर लिंग को जोर से मोड़ दें, तो उसकी मांसपेशियों के टूटने का खतरा हमेशा होता है। यह फ्रैक्‍चर ऐसा होता है, जिसका फिर से पूरी तरह ठीक होना संभव नहीं।

मैथुन से जुड़ी भ्रांति : लोगों में एक भ्रांति होती है कि मैथुन करने से नपुंसकता आती है और आगे चलकर बच्‍चे पैदा करने में वो इंसानर अक्षम हो जाता है। जबकि ऐसा कुछ नहीं है। वैज्ञानिकों के अनुसार मैथुन मा‍नसिक शांति प्रदान करता है। यह स्‍वास्‍थ्‍य के लिये तभी हानिकारक होता है, जब जरूरत से ज्‍यादा किया जाये। जरूरत से ज्‍यादा मैथुन करने से ही लिंग में टेढ़ापन आता है।

महिलाएं भी करती हैं मैथुन : यह बात बहुत लोगों को नहीं पता होती है, कि महिलाएं भी मैथुन करती हैं। हालांकि ऐसी महिलाओं की संख्‍या आम तौर पर कम होती है।

क्‍या होता है सिगरेट, शराब, तनाव से : सिगरेट, शराब, आदि के अधिक सेवन व जरूरत से ज्‍यादा तनाव लेने से पुरुषों के स्‍पर्म काउंट कम होने की आशंका बनी रहती है। यदि स्‍पर्म काउंट कम हुआ बच्‍चा पैदा करने में कठिनाई होती है। भले ही लिंग में कड़ापन आता है।

जब माहौल सुरक्षित होता : जब माहौल सुरक्षित होता है, खाने-पीने की दिक्कत नहीं होती और परिस्थितियां अनुकूल होती हैं, तो पुरुष अपने बच्चों और पत्नी के साथ खुश रहते हैं। हालात खराब होने पर पुरुष अल्पकालीन तरीके अपनाते हैं और अधिक संभोग करते हैं।

आलिंगनबद्ध होकर सोना : सर्वे के अनुसार 22 प्रतिशत पुरुष पूरी रात आलिंगनबद्ध होकर सोना चाहते हैं, जबकि ऐसा चाहने वाली महिलाओं की संख्या 18 प्रतिशत है।

कच्ची उम्र में : कच्ची उम्र में लापरवाही से सेक्स करने के कारण महिलाओं में सर्विकल कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं।

दुबला-पतला दिखना : दुबला-पतला दिखना उनके लिए खतरनाक हो सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चे के लिए योजना बना रही महिलाओं के लिए मोटे होने से अधिक खतरनाक पतला होना है।

विपरीत परिस्थितियों के दौरान : विपरीत परिस्थितियों के दौरान पुरुष में अधिक शारीरिक संबंध बनाने की प्रवृति देखने को मिलती है।

पूर्व योजना के गर्भधारण : 36 फीसद लोगों ने कहा कि उन्हें एक ऐसे नजदीकी मित्र अथवा परिवार के सदस्य के बारे में जानकारी है, जिसे बिना पूर्व योजना के गर्भधारण हो गया।

अनियोजित गर्भधारण : अनियोजित गर्भधारण और यौन संचारित संक्रमणों पर केंद्रित सर्वे के अनुसार करीब एक-तिहाई लोगों को मित्रों से गर्भनिरोधकों के बारे में गलत सूचना मिली।

कंडोम का इस्‍तेमाल : ऐक्‍शन एड के सर्वे के एक सर्वे के अनुसार ग्रामीण इलाकों में व निचले तबकों में 80 फीसदी पुरुष कंडोम का इस्‍तेमाल नहीं करते हैं।

निगाहें सीधे उनके स्‍तनों पर : सर्वे के अनुसार सामने अगर अगर महिला खड़ी है, और उसकी ओर देख नहीं रही है, तो 83 फीसदी पुरुषों की निगाहें सीधे उनके स्‍तनों पर पड़ती है। पुरुष महिला के पीछे है, तो उसकी पहली निगाह उसके हिप्‍स की ओर जाती है।

पुरुषों को गले लगना : अध्ययन में पता चला है कि पुरुषों को गले लगना ज्यादा पसंद आता है, जबकि तीन में से एक महिला खुद को इस अवस्था में सहज महसूस नहीं करती और पुरुष साथी की नाराजगी के डर से दबाव में ऐसा करती है।

सोने के लिए : सोने के लिए जाने से पहले 55 प्रतिशत महिलाएं अपने पुरुष साथी को आलिंगन की इजाजत देती हैं।

बिस्तर पर आलिंगनबद्ध : 45 प्रतिशत महिलाएं स्वीकार करती हैं कि उन्हें बिस्तर पर आलिंगनबद्ध होना पसंद नहीं है और वे अच्छी नींद लेना चाहती हैं।

बिस्तर पर अपने साथी के साथ : पांच में से एक महिला का कहना है कि वह बिस्तर पर अपने साथी के साथ लंबे समय तक शारीरिक संपर्क में नहीं रहना चाहती। क्‍योंकि वो असहज महसूस करती हैं।

इंटरनेट इस्‍तेमाल करने वाली महिला : इंटरनेट इस्‍तेमाल करने वाली महिलाओं में 10 फीसदी का कहना है कि वह बिस्तर पर अपने साथी के साथ आलिंगनबद्ध होने की बजाए फेसबुक देखना पसंद करती हैं।

केवल दो बार : सर्वे के अनुसार एक-तिहाई महिलाएं सप्ताह भर में केवल दो बार ही यौन संबंध स्‍थापित करती हैं।

झगड़े की स्थिति : करीब 36 प्रतिशत पुरुष कहते हैं कि रात के समय आलिंगन न होने से शयनकक्ष में तनाव या झगड़े की स्थिति होती है।

तीव्र दर्द महसूस हुआ : एक तिहाई महिलाओं का कहना है कि पहली बार संभोग करने पर उन्‍हें गुप्‍तांगों में तीव्र दर्द महसूस हुआ।

पुरुषों का कहना : 62 फीसदी पुरुषों का कहना है कि मैथुन के बाद संभोग करने से उनके लिंग में दर्द होता है, जिस वजह से उनका मजा खराब हो जाता है।

कंडोम का प्रयोग : सर्वे के अनुसार 14 से 17 वर्ष की आयु के बीच यौन संबंध स्‍थापित करने वाले 75 फीसदी लोगों ने कहा कि उन्‍होंने कंडोम का प्रयोग न के बराबर किया।

कंडोम का इस्‍तेमाल पसंद नहीं : 79 फीसदी पुरुष कहते हैं कि उन्‍हें कंडोम का इस्‍तेमाल करना पसंद नहीं, लेकिन पार्टनर के गर्भवती होने व यौन संक्रमण से बचने के लिये वो मजबूरन प्रयोग करते हैं।

कंडोम पसंद नहीं : 73 फीसदी महिलाएं कंडोम का प्रयोग पसंद नहीं करती हैं।

मैथुन करना पसंद : 45 से ज्‍यादा उम्र के पुरुषों के बीच किये गये सर्वेक्षण के अनुसार 23 फीसदी पुरुष इस उम्र में भी हस्‍त मैथुन करना पसंद करते हैं।

असहज महसूस करती हैं : सर्वेक्षण के अनुसार 63 फीसदी महिलाएं सार्वजनिक स्‍थान पर कंडोम या अन्‍य गर्भनिरोधक से जुड़े सवाल पर असहज महसूस करती हैं।

सैनिटरी पैड : सर्वे के अनुसार 43 फीसदी लड़कियां सैनिटरी पैड खरीदने में झिझकती हैं। ऐसी लड़कियां उसी दुकान से पैड खरीदना पसंद करती हैं, काउंटर पर महिला हो।

कंडोम खरीदते वक्‍त : 87 फीसदी पुरुष मेडिकल स्‍टोर या अन्‍य दुकान पर कंडोम खरीदते वक्‍त कतई नहीं झिझकते हैं।

शादी-शुदा मर्दों के साथ : 11 फीसदी महिलाएं जो शादी के पहले यौन संबंध स्‍थापित कर चुकी थीं, उनके अंदर उस दौरान शादी-शुदा मर्दों के साथ सोने की इच्‍छा होती थी।

50 साल की उम्र के ऊपर : 50 साल की उम्र के ऊपर के पुरुष कंडोम का इस्‍तेमाल सबसे कम करते हैं। यह एक चिंता का विषय है।

अन्‍य स्‍त्री अथवा पुरुष : सर्वेक्षण के अनुसार 89 फीसदी पुरुषों ने और 68 फीसदी महिलाओं ने यह स्‍वीकार किया कि अपने लाइफपार्टनर के साथ यौन संबंध स्‍थापित करते वक्‍त अकसर वे किसी अन्‍य स्‍त्री अथवा पुरुष के बारे में सोचते हैं।

स्रोत : Read more at: http://hindi.oneindia.in/news/2013/06/28/feature-what-research-says-about-sexual-health-and-behaviour-251283.html, Posted by: Ajay Mohan Updated: Wednesday, July 31, 2013, 11:05 [IST]

Wednesday, 9 October 2013

मॉर्निंग सेक्स करें और हार्ट अटैक को कहें अलविदा

मॉर्निंग सेक्स के 8 लाजवाब बहाने

सुबह-सुबह अलार्म क्लॉक की कर्कश आवाज हममें से कइयों को बहुत तकलीफ देती है। लेकिन उसकी आवाज बंद करने से अच्छा क्यों ना इसका फायदा उठाया जाए? जी हां, यही तो वो समय होता है जब आप सुबह-सुबह अपने पार्टनर के साथ एक अलसाये से मॉर्निंग सेक्स का मजा ले सकते हैं। ऐसा क्या है मार्निंग सेक्स में? खुद ही पढ़ लीजिए...

इससे अच्छा और क्या?

क्या आप दिन शुरू करने के इससे मजेदार तरीके के बारे में सोच सकते हैं। ऐसा कहा जाता है कि जब आपकी सुबह अच्छी हो तो सारा दिन ही शानदार जाता है। अब एक अच्छे सेक्स से लाजवाब अहसास और क्या हो सकता है? और रिसर्च में पता चला है कि इस दौरान आपकी बॉडी से ऑक्सीटॉसिन निकलता है जो आपके पार्टनर के साथ आपके जुड़ाव को मजबूती देता है।

थोड़ी देर ही सही

कई बार आप सुबह उठकर भी बिस्तर से नहीं निकलते। और इसी चक्कर में अक्सर लेट हो जाते हैं। अब बिस्तर में पड़े रहकर घड़ी की तरफ देखते रहने से अच्छा तो यही है कि अपने पार्टनर के साथ कुछ खूबसूरत पल बिता लिए जाएं।

खुशनुमा शामें

अगर आप बहुत दिनों से रिलेशनशिप में हैं तो हमें पूरा यकीन है कि सेक्स अब आपकी लाइफ में बहुत महत्वपूर्ण नहीं होगा। और वैसे भी शाम को ऑफिस से थककर आने के बाद सेक्स के लिए आपके पास ना तो एनर्जी बचती है और ना ही टाइम। अपनी रिलेशनशिप को एक नई धार देने के लिए और हर शाम को खुशनुमा बनाने के लिए मॉर्निंक सेक्स से बढ़िया कोई नहीं।

आलस से भरे सेक्स का मजा

आराम से बिस्तर में पड़े रहकर, सुबह की अलसाई सी नींद में सेक्स करने का मजा ही अलग होता है। इस समय डॉगी या स्पूनिंग पोजिशन सबसे सही रहता है।

हेल्थ बूस्टर

रिसर्च में पता चला है कि सुबह का सेक्स आपके इम्युनिटी लेवल को बढ़ाता है। और हां, इससे आप इंफेक्शन जैसे खतरे से भी बचे रह सकते हैं। तो, करिए मॉर्निंग सेक्स और सर्दी, खांसी जैसे बिमारियों को दिखाइए ठेंगा।

समय की बचत

ऑफिस के लिए लेट हो रहे हैं? तो क्यों न साथ ही साथ नहा लिया जाए और थोड़ी बहुत मौज-मस्ती भी हो जाए..;) आखिरकार इससे आपका समय और पानी दोनों बचेगा। है ना अच्छा आइडिया!

देर तक साथ रहें

सुबह-सुबह आप एक अच्छी नींद के बाद तरोताजा रहते हैं और इस समय आप शरारतें भी कुछ ज्यादा कर सकते हैं। और हां, सुबह उन खास पलों के लंबा खिंचने की संभावना भी सबसे ज्यादा रहती है।

दिल की बिमारी को कहें अलविदा

आपको पूरे दिन खुश रखने के अलावा मॉर्निंग सेक्स आपके दिल को भी खुश रखता है। अब जब इतने फायदे हों, तो मॉर्निंग सेक्स से परहेज कैसा! जम कर सेक्स करें और दिल के साथ दिमाग को भी सूकून के कुछ पल दें।

स्त्रोत : नव भारत टाइम्स dot कॉम | Oct 8, २०१३

Tuesday, 1 October 2013

क्‍या है संभोग करनें का सही तरीका?

सही मायने में शारीरिक सम्बन्धों द्वारा भोगा गया आनन्द ही सम्भोग कहलाता है। इसमें संभोगानंद स्त्री-पुरुष को एक बराबर दोनों को मिलता है। स्खलन के साथ ही पुरुष को तो पूर्ण आनन्द की प्राप्ति हो जाती है और सेक्स सम्बन्ध स्थापित होते ही पुरूष का स्खलन निश्चित हो जाता है। यह स्खलन एक मिनट में भी हो सकता है तो दस मिनट में भी। अर्थात् पुरुष को पूर्णानंद की प्राप्ति हो जाती है। इसलिए मुख्य रूप से स्त्री को मिलने वाले आनन्द की तरफ ध्यान देना आवश्यक है। अगर स्त्री को सहवास का सुख न मिले तो इसे सम्भोग नहीं माना जाना चाहिए।

इस वास्तविकता से व्यक्ति पूरी तरह से अनभिज्ञ होकर अपने तरीके से सेक्स सम्बन्ध बनाता है और स्त्री के आनन्द की तरफ कोई ध्यान नहीं देता है। इसे केवल सिर्फ भोग ही मानना चाहिए। सम्भोग की वास्तविकता को समझे बिना इसे जानना मुश्किल होगा। विवाह के बाद व्यक्ति सम्भोग करने के स्थान पर भोग करता है तो इसका मतलब यह है कि वह इस तरफ से अनजान है कि स्त्री को सेक्स का पूरा आनन्द मिला कि नहीं। सम्भोग शब्द की महत्ता को को जानना होगा। स्त्री को भोगें नहीं, समान रूप से आनन्द को सही तरीके से उसे दें, यही संभोग है।

युवक-युवती जब विवाह के उद्देश्य को समझ कर विवाह-बंधन में बंधते हैं तो वे इस बात से अवश्‍य वाकिफ होते हैं कि उनके प्रेम भरे क्रिया-कलापों का अंत संभोग होगा। प्रत्येक शिक्षित युवक-युवती यह जानते हैं कि संभोग विवाह का अनिवार्य अंग है। यदि कोई सहेली ऐसी नवयुवती से पूछती है कि तू विवाह करने तो जा रही है, किन्तु यह भी जानती है कि संभोग कैसा होता है? वो या तो इसका उत्तर नही देगी अथवा कह देगी कि उसके बारे मे जानने की क्या आवश्यकता है? संभोग तो पुरुष करता है। इसलिए उसे ही जानना चाहिए कि संभोग कैसे करना चाहिए। ऐसे प्रश्नों पर युवक हंसकर उत्तर देता है, भला यह भी कोई पूछने की बात है। संभोग करना कौन नहीं जानता यानी सबको पता है। रति-क्रिया शुरू करने की स्थिति-
यह ठीक है कि अनेक प्रकार की काम-क्रीड़ा से स्त्री संभोग के लिए तैयार हो जाए और उसकी योनि तथा पुरुष के शिश्न मुण्ड में स्राव आने लगे तो योनि में शिश्न डालकर मैथुन की शुरूआत कर देना चाहिए।
परन्तु जिस बात पर हमेंशा जोर दिया जाना चाहिए वह यह है कि योनि में शिश्न डालने के पश्चात् ही काम-क्रीड़ाओं को बंद नहीं कर देना चाहिए, जिनके द्वारा स्त्री को संभोग के लिए तैयार किया गया है।
यह ठीक है कि समागन के कुछ आसन ऐसे होते हैं, जिनमें बहुत अधिक प्रणय क्रीड़ाओं की गुंजाइश नहीं होती, परन्तु ऐसे आसन बहुत कम होते हैं।
योनि में शिश्न के प्रवेश करने के बाद जब तक संभव हो सके इन क्रियाओं को जारी रखना चाहिए।
यदि किसी आसन में नारी का चुम्बन लेते रहना संभव न हो तो स्तनों को सहलाते और मसलते रहना चाहिए। 
अगर स्तनों को मसलना या पकड़कर दबाना भी संभव न हो तो इसके चुचकों का ही स्पर्श करते रहना चाहिए। 
इससे तात्पर्य यह है कि इस समय जो भी प्रणय-कीड़ा संभव हो सके, उसे जारी रखना चाहिए।
इससे काम आवेग में वृद्धि होती है, मनोरंजन बढ़ता है और स्त्री के उत्साह में वृद्धि होती है।
प्रणय क्रीड़ाएं प्रमुख अनिवार्य विषय जो लोग मैथुन कार्य प्रारम्भ होते ही प्रणय क्रीड़ा बंद कर देते हैं, वे प्रणव-क्रीड़ा को मैथुन से अलग मानते हैं।
उनकी धारणा है कि मैथुन कार्य प्रारम्भ होते ही प्रणय क्रियाओं की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
यह धारणा बिल्कुल गलत है।
इन दोनों चीजों को एक-दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता।
इस स्थिति में आकर प्रणय-क्रीड़ाओं को एकदम बंद कर देने से वह सिलसिला टूट जाता है, जिसमें स्त्री रुचि लेने लगी थी।
इस बात को सदा याद रखना चाहिए कि काम-क्रीड़ा के दो उद्देश्य होते हैं-
एक तो इस क्रिया द्वारा आनन्द प्राप्त करना और दूसरे दोनों सहयोगियों-विशेषतया-स्त्री को प्रणय-क्रिया के अंतिम कार्य अर्थात् संभोग के लिए तैयार करना।
इन दोनों बातों पर ध्यान देने से यह स्पष्ट हो जाएगा कि यदि संभोग की स्थिति पर पहुंचकर प्रणय-क्रीड़ा में अनावश्यक अवरोध पैदा कर दिया जाए या इस क्रीड़ा को बंद ही कर दिया जाए तो स्त्री के मन में झुंझलाहट पैदा हो जाएगी।
इस बात को अधिक स्पष्ट करने के लिए इस दृश्य की कल्पना कीजिए।
पुरुष नारी के गले में बाहें डाले हुए उसके स्तनों का चुम्बन कर रहा है, साथ ही वह उन्हें मसलता जाता है और उसके चूचुकों को भी समय-समय पर स्पर्श कर लेता है। स्वाभाविक है कि इससे नारी के उत्साह और काम के आवेग में वृद्धि होती है। वह उसके हाथ को अपने स्तनों पर और दबा लेती है। इसका तात्पर्य यह है कि वह चाहती है कि पुरुष उनको और जोर से मसले, क्योंकि इससे उसे और अधिक आनन्द आता है। पुरुष इस संकेत को दूसरे रूप में लेता है और समझता है कि स्त्री पर कामोन्माद का पूरा आवेग चढ़ चुका है। बस वह स्तनों को मसलना बंद करके नारी की योनि में अपने शिश्न को प्रविष्ट करने की तैयारी करने लगता है। इससे स्त्री को बड़ी निराशा होती है। पुरुष उसकी योनि में शिश्न डाले, इसमें तो उसे कोई आपत्ति नहीं है, किन्तु वह यह नहीं चाहती कि वह स्तनों को मसलना बंद कर दे। उसे उसके मर्दन (मसलने) से जो आनन्द प्राप्त हो रहा था, उसका सिलसिला बीच में टूट गया। वह यह नहीं चाहती थी। इसलिए यह आवश्यक है कि संभोग क्रिया आरंभ होते समय और उसके जारी रहते हुए न तो प्रणय-क्रीड़ा को समाप्त करें और न उसमें कोई रुकावट ही आने दें।

यह तो सभी लोग जानते हैं कि संभोग क्रिया में पुरुष और स्त्री दोनों ही समान रूप से भागीदार होते हैं, किन्तु बहुत से लोगों का विचार यह है कि पुरुष सक्रिय भागीदार की भूमिका अदा करता है तथा स्त्री केवल सहन करती है अथवा स्वीकार मात्र करती है-यह विचार भ्रांतिपूर्ण है। स्त्रियों के जनन अंग बने ही इस प्रकार के हैं कि वे संभोग में कभी निष्क्रिय रह ही नहीं सकते। यूरोपीय देशों की अनेक कुमारी नवयुवतियों ने इस बात को स्वीकार किया है कि जब पहली बार किसी पुरुष ने उनके उरोजों को पकड़कर चूचुकों को धीरे-धीरे सहलाना शुरू किया तो उनकी योनि में विशेष तरह की फड़क-सी अनुभव हुई और यह इच्छा जाग्रत हुई कि कोई कड़ी वस्तु उसमें जाकर घर्षण करें। कुछ पत्नियां ऐसी होती हैं जो जान-बूझकर निष्क्रिय भूमिका अदा करना चाहती हैं। वे समझती हैं जब पति उसका चुम्बन, कुचमर्दन (स्तनों को सहलाना, मसलना) आदि करे तो उन्हें ऐसा आभास देना चाहिए कि पुरुष के इस कार्य से उन्हें आनन्द नहीं मिल रहा है। उन्हें आशंका होती है कि यदि वे आनन्द प्राप्ति का आभास देंगी तो पति यह समझ लेंगे कि वे विवाह से पूर्व संभोग का आनन्द ले चुकी हैं। इस प्रकार के विचारों को उन्हें अपने मन से निकाल देना चाहिए। संभोग करते समय इस बात को याद रखना चाहिए कि संभोग में सबसे अधिक आनन्द प्राप्त करने के लिए जिस आवेग की आवश्यकता होती है, वह तभी प्राप्त हो सकता है जब योनि में शिश्न निरंतर गतिशील रहे। इस गति का संबंध हरकत करने से है। इस स्थिति में शिश्न कड़ा और सीधा होकर योनि की दीवारों की मुलायम परतों तथा गद्दियों के सम्पर्क में आ जाता है। इसके फलस्वरूप शिश्न के तंतुओं में अधिकाधिक तनाव आ जाता है, जिसकी समाप्ति वीर्य स्खलन के साथ होती है। 

संभोग करते समय बहुत से पुरुषों को आशंका रहती है कि योनि में उनका लिंग प्रवेश करते ही वे स्खलित हो जाएंगे। इसी आशंका से भयभीत होकर वे योनि में शिश्न प्रविष्ट करके जल्दी-जल्दी हरकत करने लगते हैं और इस प्रकार वे बहुत जल्दी स्खलित हो जाते हैं। सेक्स के वास्तविक आनन्द की प्राप्ति के लिए यह आवश्यक है कि शिश्न के पूर्णतया प्रविष्ट हो जाने के बाद स्त्री पुरुष दोनों स्थिर होकर चुम्बन मर्दन आदि करें। इसके थोड़ी देर बाद फिर गति आरंभ करें। जब फिर स्खलन होने की आशंका होने लगे, तब फिर रुककर चुम्बन आदि में प्रवृत्त हो जाएं, इससे दोनों को अधिकाधिक आनन्द प्राप्त होगा। इस स्थिति में स्त्री को चाहिए कि जब पुरुष गति लगाए तब वह योनि को संकुचित करे, जितना अधिक वह संकुचित करेगी, उतना ही पुरुष का आनन्द बढ़ेगा और वह क्रिया करने लगेगा। ऐसा करने से स्त्री और पुरुष दोनों को आनन्द आएगा। इस भांति रुक-रुककर गति लगाने से स्त्री पूर्ण उत्तेजना की स्थिति में पहुंच जाती है। उस समय उसकी इच्छा होती है कि अब पुरुष जल्दी-जल्दी गति देकर अपने-आपको और स्त्री दोनों को स्खलित कर दे। उस समय पुरुष को जल्दी-जल्दी गति लगानी चाहिए, स्त्री को भी इसमें अपनी ओर से पूरा सहयोग देना चाहिए।

अधिकांश स्त्रियों की यह धारण सही नहीं है कि गति लगाना केवल पुरुष का ही काम है। जब कुछ देर तक स्त्री-पुरुष के यौन अंग एक-दूसरे पर घात-प्रतिघात करते रहते हैं तो इस क्रिया से अब तक मस्तिष्क को जो आनन्द मिल रहा था, वह बढ़ते-बढ़ते इतना अधिक हो जाना हो जाता है कि मस्तिष्क इससे अधिक आनन्द बर्दाश्त नहीं कर पाता। इस समय स्त्री-पुरुष यौन आनन्द की चरम सीमा पर पहुंच चुके होते हैं, जिसे चिकित्सा विज्ञान की भाषा में चरमोत्कर्ष कहा जाता है। ऐसी परिस्थिति में मस्तिष्क अपने आप संभोग क्रिया को समाप्त करने के संकेत देने लगता है। पुरुष व स्त्री स्खलित है जाते हैं। पुरुष के शिश्न से वीर्य निकलता है और स्त्री की योनि से पानी की तरह पतला द्रव्य।


स्खलन के बाद क्‍या करें : संभोग के बाद जब वीर्य स्खलित हो जाता है तो अधिकांश पुरुष समझ लेते हैं कि अब काम समाप्त हो गया है और सो जाने के अलावा कोई काम शेष नहीं रह गया है। उनकी यह बहुत बड़ी भूल है। स्खलन के साथ ही मैथुन समाप्त नहीं हो जाता। वीर्य स्खलन का अर्थ केवल इतना है कि जिस पहाड़ की चोटी पर आप पहुंचना चाहते थे, वहां आप पहुंच गये हैं। अभी चोटी से नीचे भी उतरना है। नीचे उतरना भी एक कला है। जो पुरुष वीर्य स्खलित होने के पश्चात सो जाता है या सोने की तैयारी करने लगता है, वह अपनी संगिनी की भावना को गहरा आघात पहुंचाता है। उसके मन में यह विचार आ सकता है कि उसका साथी केवल अपनी शारीरिक संतुष्टि को महत्त्व देता है, उसकी भावना की कोई परवाह नहीं करता। पुरुष का कर्त्तव्य है कि वह स्त्री के मन में ऐसी भावना पैदा न होने दे। स्त्री को संतुष्टि तथा आनन्द प्रदान करने के लिए पुरुष को चाहिए कि वह समागम के बाद स्त्री के विभिन्न अंगों का चुम्बन ले, प्रेमपूर्वक आलिंगन करे और कुछ समय प्रेमालाप करे। इन बातों से स्त्री को यह अनुभव होगा कि पुरुष उसे कामवासना की पूर्ति का खिलौना ही नहीं समझता, वास्तव में वह उससे प्रेम करता है। इसके अलावा संभोग के बाद पुरुष का आवेग जिस गति से शांत होता है, स्त्री का आवेग उतनी तेजी से शांत नहीं होता। उसमें काफी समय लगता है। इसलिए यह आवश्यक है कि पुरुष धीरे-धीरे अपनी प्रणय क्रीड़ाओं से स्त्री को सामान्य दशा में लाए। जब उसे यह विश्वास हो जाए कि स्त्री का कामोन्माद पूरी तरह से शांत हो गया है तो भी उसे उसकी ओर मुंह फेरकर नहीं सोना चाहिए। उसे अपनी छाती से तब तक लगाए रखना चाहिए तब तक वह सो न जाए। उसके सोने के बाद ही स्वयं को सोना चाहिए।

संभोग क्रीड़ा का विभक्तिकरण : शिश्न और योनि के आकार के भेद के अनुसार जिस प्रकार संभोग क्रीड़ा का वर्गीकरण किया गया है उसी प्रकार संवेग के आधार पर भी रति-क्रीड़ा के भेद निर्धारित किए गए हैं। जिस प्रकार दो व्यक्तियों के चेहरे आपस में नहीं मिलते, जिस प्रकार दो व्यक्तियों की रुचि एवं पसन्द में तथा शारीरिक ढ़ाचे एवं मानसिक स्तर में परस्पर भिन्नता होती है, उसी प्रकार दो नर-नारियों की कामुकता एवं यौन संवेगों में पर्याप्त अन्तर होता है। कुछ नर-नारियां ऐसी होती हैं, जो प्रचण्ड यौन-क्रीड़ा को सहन नहीं कर पाती। प्रगाढ़ एवं कठोर आलिंगन, चुम्बन, नख-क्रीड़ा एवं दंतक्षत उन्हें नहीं भाता। ऐसे नर-नारियों को मृदुवेगी कहा गया है। कोमल प्रकृति होने के कारण इन्हें हल्का संभोग ही अधिक रुचिकारी होता है। जिन नर-नारियों की यौन-चेतना औसत दर्जे की अथवा मध्यम दर्जे की होती है, उन्हें मध्यवेगीय कहते हैं। ये न तो अति कामुक होते हैं और न ही इनकी यौन सचेतना मंद होती है। ये संभोग प्रिय भी होते हैं और यौन कला प्रवीण भी परन्तु काम पीड़ित नहीं होते हैं। पाक क्रीड़ा में अक्रामक रुख भी नहीं अपनाते। इनका यौन जीवन सामान्यतः संतुष्ट एवं आनन्दपूर्ण होता है। ये अच्छे तथा आदर्श गृहस्थ भी होते हैं। चण्ड वेगी नर-नारियों की कामुकत्ता प्रचण्ड होती है। ये विलासी और कामी होते हैं। बार-बार यौन क्रियाओं के लिए इच्छुक रहते हैं। मौका पाते ही संभोग भी कर लेते है। संवेगात्मक तीव्रता अथवा न्यूनता के आधार पर स्त्री-पुरुष को जो वर्गीकरण किया गया है वह प्रकार है-

समरत :

1- मनदवेगी नायक का सम्पर्क मन्दवेगी स्‍त्री के साथ।
2- मध्यवेगी नायक का वेग मध्यवेगी स्‍त्री के साथ।
3- चण्डवेगी नायक का जोड़ा चण्डवेगी स्‍त्री के साथ।

विषमरत :

1- मन्दनेगी पुरुष सा सम्पर्क मध्यवगी स्‍त्री के साथ।
2- मन्दवेगी नायक का रमण चण्डनेगी स्‍त्री के साथ।
3- मध्यवेगी नर का जोड़ा मन्दवेगी स्‍त्री के साथ।
4- मध्यवेगी पुरुष का संबध चण्डवेगी स्‍त्री के साथ।
5- चण्डवेगी नायक का संभोग मन्दवेगी स्त्री के साथ।
6- चण्डवेगी नायक का समान समागम मध्यवेगी स्‍त्री के साथ।

स्तंभनकाल : कई पुरुषों में देर तक सेक्स करने की क्षमता नहीं होती है। ऐसे पुरुष योनि में शिश्न प्रवेश के कुछ सैकैण्ड के बाद ही स्खलित हो जाते हैं। कुछ पुरुषों की स्तंभन शक्ति मध्यम दर्जे की होती है। थोड़े ही पुरुष ऐसे होते हैं जो देर तक रति-क्रीड़ा करने में सक्षम होते हैं जो पुरुष अधिक देर तक नहीं टिक पाते वे स्त्री को संतुष्ट नहीं कर सकते। उनका विवाहित जीवन कलहपूर्ण हो जाता है। इसी तरह कुछ स्त्रियां शीघ्र ही संतुष्ट हो जाती हैं-कुछ स्त्रियां मात्र थोड़े वेगपूर्ण घर्षणों से ही संतुष्ट होती हैं और कुछ स्त्रियां करीब 10-15 मिनट तक निरंतर घर्षण के पश्चात ही संतुष्ट होती हैं।

अतः यौन-संतुष्टि के लिए काल के आधार पर भी वर्गीकरण किया गया है।
1-शीघ्र स्खलित होने वाले पुरुष का संयोग शीघ्र संतुष्ट होने वाली स्त्री के साथ।
2- मध्यम अवधि तक टिकने वाले पुरुष का सेक्स संबंध मध्यकालिक रमणी (स्त्री) के साथ।
3- दीर्घकालिक पुरुष का समागम देर तक घर्षण करने के बाद पश्चात संतुष्ट होने वाली रमण प्रिया नारी के साथ। उक्त सभी वर्गीकरण स्त्री-पुरुष की मनोशारीरिक रचना एवं संवेगात्मक तीव्रता के आधार पर किए गए हैं। वही रति-क्रीड़ा सफल एवं उत्तम होती हैं जिसमें स्त्री-पुरुष दोनों चरमोत्कर्ष के क्षणों में सब कुछ भूल कर दो शरीर एक प्राण हो जाते हैं। परन्तु यह तभी संभव होता है जबकि पुरुष को सेक्स संबंधी संपूर्ण जानकारी हो तथा जिसमें पर्याप्त स्तंभन शक्ति हो। जिन पुरुषों में देर तक सेक्स करने की क्षमता होती हैं उन पर स्त्रियां मर-मिटती हैं। अनेक पुरुषों को यह भ्रम बना रहता है कि उनके समान ही स्त्रियां भी स्खलित होती हैं। यह धारणा भ्रामक, निराधार और मजाक भी है। पुरुषों के समान स्त्रियों में चरमोत्कर्ष की स्थिति में किसी भी प्रकार का स्खलन नहीं होता। नारी की पूर्ण योनि संतुष्टि के लिए आवश्यक है कि रति-क्रीड़ा में संलग्न होने के पूर्ण नारी को कलात्मक पाक-क्रीड़ा द्वारा इतना कामोत्तेजित कर दिया जाये कि वह सेक्स संबंध बनाने के लिए स्वयं आतुर हो उठे एवं चंद घर्षणों के पश्चात ही आनन्द के चरम शिखर पर पहुंच जाएं। नारी को उत्तेजित करने के लिए केवल आलिंगन, चुम्बन एवं स्तन मर्दन ही पर्याप्त नहीं होता। यूं तो नारी का सम्पूर्ण शरीर कामोत्तेजक होता है, पर उसके शरीर में कुछ ऐसे संवेदनशील स्थान अथवा बिन्दु हैं जिन्हें छेड़ने, सहलाने एवं उद्वेलित करने में अंग-प्रत्यंग में कामोत्तेजना प्रवाहित होने लगती है। नारी के शरीर में कामोत्तेजना के निम्नलिखित स्थान संवेदनशील होते हैं- शिश्निका (सर्वाधिक संवेदनशील), भगोष्ठः बाह्य एवं आंतरिक, जांघें, नाभि क्षेत्र, स्तन (चूचक अति संवेदनशील), गर्दन का पिछला भाग, होंठ एवं जीभ, कानों का निचला भाग जहां आभूषण धारण किए जाते हैं, कांख, रीढ़, नितम्ब, घुटनों का पृष्ठ मुलायम भाग, पिंडलियां तथा तलवे। इन अंगों को कोमलतापूर्वक हाथों से सहलाने से नारी शीघ्र ही द्रवित होकर पुरुष से लिपटने लगती है हाथों एवं उंगलियों द्वारा इन अंगों को उत्तेजित करने के साथ ही यदि इन्हें चुम्बन आदि भी किया जाए तो नारी की कामाग्नि तेजी से भड़क उठती है एवं रति क्रीड़ा के आनन्द में अकल्पित वृद्धि होती है। यह आवश्यक नहीं कि सभी अंगों को होंठ अथवा जिव्हा से आन्दोलित किया जाए यह प्रेमी और प्रिया की परस्पर सहमति एवं रुचि पर निर्भर करता है कि प्रणय-क्रीड़ा के समय किन स्थानों पर होठ एवं जीभ का प्रयोग किया जाए। उद्देश केवल यही है कि प्रत्येक रति-क्रीड़ा में नर और नारी को रोमांचक आनन्द की उपलब्धि समान रूप से होनी चाहिए। नारी की चित्तवृत्ति सदा एक समान नहीं रहती। किसी दिन यदि वह मानसिक अथवा शारीरिक रूप से क्षुब्ध हो, रति-क्रीड़ा के लिए अनिच्छा जाहिर करे तो किसी भी प्रकार की मनमानी नहीं करनी चाहिए। सामान्य स्थिति में भी प्रिया को पूर्णतः कामोद्दीप्त कर लेने के पश्चात् ही यौन-क्रीड़ा में संलग्न होना चाहिए। संभोग के लिए प्रवृत्ति या इच्छा- स्त्री भले ही सम्भोग के लिए शीघ्र मान जाए, परन्तु यह आवश्‍यक नहीं है कि वह इस क्रिया में भी जल्द अपना मन बना ले। पुरुषों के लिए यह बात समझना थोड़ी मुश्किल है। स्त्री को शायद सम्भोग में इतना आनन्द नहीं आता जितना कि सम्भोग से पूर्व काम-क्रीड़ा, अलिंगन, चुम्बन और प्रेम भरी बातें करने में आता है। जब तक पति-पत्नी दोनों सम्भोग के लिए व्याकुल न हो उठें तब तक सम्भोग नहीं करना चाहिए। संभोग से पूर्व व करते समय आलिंगन, चुंबन आदि अवश्‍य करें। - See more at: http://www.kranti4people.com/article.php?aid=2541#sthash.cuzZMlfc.dpuf

Tuesday 28 February 2012 |

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